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अभिमन्यु वध को देख रो पड़े दर्शक
Updated Sat, 15 Dec 2018 09:16 PM IST
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घाट/पीपलकोटी। सुतोल गांव में पांडव नृत्य के दौरान शनिवार को चक्रव्यूह का भव्य मंचन किया गया। चक्रव्यूह मंचन के दौरान अभिमन्यु चक्रव्यूह के छह द्वार तोड़कर सातवें द्वार तक पहुंच जाता है, लेकिन यहां दुर्योधन छल-कपट से उसका वध कर देता है। अभिमन्यु वध को देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। सुतोल गांव में सात दिसंबर से पांडव नृत्य का आयोजन चल रहा है।
शनिवार को सुतोल गांव में चक्रव्यूह मंचन का भव्य आयोजन किया गया। मंचन में दिखाया गया कि धनुर्धारी अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को मारने के लिए दुर्योधन चक्रव्यूह का आयोजन करता है। अभिमन्यु ने जैसे ही चक्रव्यूह में प्रवेश किया, तो पहले द्वार पर जयद्रथ उसका रास्ता रोक लेता है। वह जयद्रथ को परास्त कर आगे बढ़ जाता है। शत्रचक्र में अभिमन्यु अकेला पड़ जाता है। कर्ण और दुर्योधन गुरु द्रोणाचार्य के निर्देश पर युद्ध के सारे नियम तोड़कर अभिमन्यु पर आक्रमण करना शुरू कर देते हैं। कर्ण बाण चलाकर अभिमन्यु के रथ को खंडित कर देता है, जिससे अभिमन्यु भूमि पर गिर पड़ता है और दुर्योधन उसका वध कर देता है। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इस दौरान पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष दर्शन सिंह नेगी, ग्राम प्रधान देवेश्वरी देवी, देवकी देवी, हयात सिंह, देवेंद्र सिंह, पार सिंह, भरत सिंह, यशवंत, राजेंद्र, गब्बर सिंह, नंदन सिंह, सीता देवी और भजन सिंह आदि मौजूद थे। वहीं, पीपलकोटी के अगथला गांव में आयोजित पांडव नृत्य में प्रतिदिन ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडव परिवार अस्त्र-शस्त्रों के साथ अद्भुत नृत्य कर रहे हैं। इस मौके पर क्षेत्र पंचायत सदस्य हरिबोधनी खत्री, रणजीत सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह, ताजबर, संदीप, शिशुपाल, राकेश सिंह, नरेंद्र सिंह, भूपाल आदि मौजूद थे।
ढोल-दमांऊ की थाप पर किया देव नृत्य
कर्णप्रयाग। मैखुरा गांव में आयोजित पांडव लीला के दूसरे दिन पांडवों के पश्वाओं ने ढोल-दमांऊ की थाप पर देव नृत्य किया। प्रत्येक तीन वर्ष में मैखुरा गांव में होने वाले पांडव नृत्य में प्रवासी और अप्रवासी ग्रामीणों, ध्याणियों ने पांडव देवताओं को वस्त्र, आभूषण अर्पित किए। इस मौके पर कैलाश खंडूड़ी, गोपाल दत्त मैखुरी, जानकी प्रसाद, परमानंद मैखुरी, सुनील, विजेंद्र, जयंती प्रसाद आदि मौजूद रहे।
शनिवार को सुतोल गांव में चक्रव्यूह मंचन का भव्य आयोजन किया गया। मंचन में दिखाया गया कि धनुर्धारी अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को मारने के लिए दुर्योधन चक्रव्यूह का आयोजन करता है। अभिमन्यु ने जैसे ही चक्रव्यूह में प्रवेश किया, तो पहले द्वार पर जयद्रथ उसका रास्ता रोक लेता है। वह जयद्रथ को परास्त कर आगे बढ़ जाता है। शत्रचक्र में अभिमन्यु अकेला पड़ जाता है। कर्ण और दुर्योधन गुरु द्रोणाचार्य के निर्देश पर युद्ध के सारे नियम तोड़कर अभिमन्यु पर आक्रमण करना शुरू कर देते हैं। कर्ण बाण चलाकर अभिमन्यु के रथ को खंडित कर देता है, जिससे अभिमन्यु भूमि पर गिर पड़ता है और दुर्योधन उसका वध कर देता है। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। इस दौरान पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष दर्शन सिंह नेगी, ग्राम प्रधान देवेश्वरी देवी, देवकी देवी, हयात सिंह, देवेंद्र सिंह, पार सिंह, भरत सिंह, यशवंत, राजेंद्र, गब्बर सिंह, नंदन सिंह, सीता देवी और भजन सिंह आदि मौजूद थे। वहीं, पीपलकोटी के अगथला गांव में आयोजित पांडव नृत्य में प्रतिदिन ढोल-दमाऊं की थाप पर पांडव परिवार अस्त्र-शस्त्रों के साथ अद्भुत नृत्य कर रहे हैं। इस मौके पर क्षेत्र पंचायत सदस्य हरिबोधनी खत्री, रणजीत सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह, ताजबर, संदीप, शिशुपाल, राकेश सिंह, नरेंद्र सिंह, भूपाल आदि मौजूद थे।
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ढोल-दमांऊ की थाप पर किया देव नृत्य
कर्णप्रयाग। मैखुरा गांव में आयोजित पांडव लीला के दूसरे दिन पांडवों के पश्वाओं ने ढोल-दमांऊ की थाप पर देव नृत्य किया। प्रत्येक तीन वर्ष में मैखुरा गांव में होने वाले पांडव नृत्य में प्रवासी और अप्रवासी ग्रामीणों, ध्याणियों ने पांडव देवताओं को वस्त्र, आभूषण अर्पित किए। इस मौके पर कैलाश खंडूड़ी, गोपाल दत्त मैखुरी, जानकी प्रसाद, परमानंद मैखुरी, सुनील, विजेंद्र, जयंती प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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