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आईसीसीयू ठप, कबाड़ हो गईं लाखों की मशीनें

Wed, 28 Nov 2018 01:31 AM IST
Updated Wed, 28 Nov 2018 01:31 AM IST
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आईसीसीयू ठप, कबाड़ हो गईं लाखों की मशीनें
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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लाखों रुपये खर्च कर एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश आईसीसीयू स्थापित किया गया था। मकसद यह था कि शहर से लेकर गांव तक के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके। इसके इतर बीते दो साल से आईसीयू में ताला लगा है। इसमें बंद लाखों की मशीनें उपयोग हुए बिना ही कबाड़ हो चुकी हैं। इस चिकित्सालय एसपीएस में रोजाना नगर क्षेत्र के अलावा नरेंद्रनगर, मुनिकीरेती, ढालवाला, ब्यासी, यमकेश्वर आदि ग्रामीण क्षेत्रों से लोग उपचार के लिए पहुंचते हैं।
बहरहाल एसपीएस राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश में स्थापित इंटेनसिव केयर यूनिट (आईसीसीयू) बीते दो वर्ष से ठप है। इसमें करीब 15 लाख की मशीनरी बिना उपयोग हुए बेकार हो चुकी है। अपनी मियाद पूरी कर चुकी मशीनों का साफ्टवेयर किसी काम का नहीं रह गया है। आईसीसीयू में टी फेब्रुलेटर, कार्डियोथोरोसिक, रेस्पोरेटिव मीटल, मॉनीटरिंग मशीन, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सेंटर, वेंटिलेटर आदि ऐसी कई मशीने हैं। इन मशीनों की कीमत करीब 15 लाख रुपये है। आईसीसीयू में छह बेड हैं। कार्डियोलॉजिस्ट और पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से मशीनें सफेद हाथी की तरह खड़ी हैं।
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आईसीयू संचालन की बुनियादी जरूरतें
आईसीसीयू के लिए एक कार्डियोलॉजिस्ट, छह नर्स, तीन सफाईकर्मी, तीन वार्ड ब्वाय होने चाहिए। वर्तमान में यहां 15 चिकित्सक हैं, इनमें से दो संविदा कर्मी हैं। 10 चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। मानकों के मुताबिक अस्पताल में 25 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए।
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ज्यादातर पद खाली, कैसे सुचारु हो व्यवस्था
वर्तमान में कुल 10 पद राजकीय चिकित्सालय में रिक्त है। इनमें चिकित्साधीक्षक (पुरुष) का एक, चिकित्साधीक्षक (महिला) एक, हृदय रोग विशेषज्ञ एक, चिकित्साधिकारी कार्डियोलॉजी एक, निश्चेतक के दो, चिकित्साधिकारी आपातकालीन दो, गाइनोकोलॉजिस्ट (पीपीसी) दो, जीडीएमओ एक के पद शामिल हैं। इनमें निश्चेतक का पद वर्तमान में सीएमएस खुद संभाल रहे हैं।

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ऋषिकेेश में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा वाला एम्स जैसा संस्थान उपलब्ध है। इस कारण सरकार अब राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश को नजरअंदाज कर रही है। सरकार अति दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए अपना फोकस कर रही है, लेकिन ऋषिकेश सुगम स्थानों में आता है। यह भी एक कारण है कि सरकार का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। हमारी ओर से अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को लेकर कई बार पत्राचार किया जा चुका है। बीते 10 अक्टूबर को भी शासन में चिकित्सकों की कमी से अवगत कराया गया। फिलहाल अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठ पाया है।
-एनएस तोमर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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