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मधुमेह से शरीर का कोई अंग अछूता नहीं : रविकांत
Updated Sat, 24 Nov 2018 01:11 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
मधुमेह रोग आधुनिक युग की महामारी बन गया है। प्रगतिशील देशों में डायबिटीज विकराल रूप धारण कर चुका है। यह रोग 1920 के दशक में होने वाली सिफलिस बीमारी के समान खतरनाक है। यह बात एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने उत्तराखंड कॉर्डियाबकान कार्यशाला के दौरान कही।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में शुक्रवार को दो दिवसीय उत्तराखंड कॉर्डियाबकान 2018 कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि मधुमेह जैसे रोग से मानव शरीर का कोई अंग अछूता नहीं रहता। उन्होंने प्रत्येक चिकित्सक को डायबिटीज में दक्षता हासिल करने के साथ ही समय समय पर अपनी योग्यता का पुनरावलोकन करने की सलाह दी। इसके अलावा शुगर का कंट्रोल खाली व भरे पेट के आधार पर करने की बजाए ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबिन एचबीए 1सी पद्धति से करने को कहा। संस्थान की डीन प्रो. सुरेखा किशोर ने कहा कि भारत जैसे देश में सामुदायिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
कार्यशाला के पहले दिन डॉ. यश श्रीवास्तव ने कनिष्ठ चिकित्सकों को इकोकार्डियोग्राफी का बेसिक व एडवांस प्रशिक्षण दिया। डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि फोर डी इकोकार्डियोग्राफी देश के चुनिंदा अस्पतालों में उपलब्ध है, जिनमें एम्स ऋषिकेश भी शामिल है। डॉ. रोहित वालिया ने इंप्लांटेबल डिफिबिलेटर, कॉर्डियक रिसिकुनाइजेशन थैरेपी, लीडलैस पेसमेकर, नई पेसिंग विधि हिजबंडल पेसिंग की जानकारी दी। कार्यशाला के समन्वयक व डिवीजन ऑफ डायबिटीज एंड मेटाबॉलिज्म डॉ. रविकांत ने मधुमेह के क्षेत्र में होने वाली प्रगति जैसे इंसुलिन पंप, कंटीन्यूअस ग्लूकोज मानिटरिंग सिस्टम व अन्य चिकित्सा पद्धति पर जोर दिया। कार्यशाला में सह समन्वयक व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी धर, कार्यक्रम सचिव डॉ. मोनिका पठानिया, सह सचिव डॉ. मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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‘मैं और मेरी मधुमेह’ पुस्तक का विमोचन
ऋषिकेश। कार्यशाला के प्रथम दिन मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. रविकांत की ‘मैं और मेरी मधुमेह’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इसमें मधुमेह से संबंधित विशेषज्ञों के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। इनमें डॉ. सुरेखा किशोर, डॉ. सुरेश शर्मा, विनीता थपलियाल, डॉ. जया चतुर्वेदी, डॉ. रविन विश्नोई, डॉ. शिव वर्मा, डॉ. नीरज कुमार सिंह, डॉ. वरुण, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. मीनाक्षी धर के लेख शामिल हैं। हिंदी में प्रकाशित इस पुस्तक में डायबिटीज के मरीजों के रहन सहन, खानपान, जटिलताओं, व्यायाम व उपचार संबंधी जानकारियां हैं।
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मधुमेह रोग आधुनिक युग की महामारी बन गया है। प्रगतिशील देशों में डायबिटीज विकराल रूप धारण कर चुका है। यह रोग 1920 के दशक में होने वाली सिफलिस बीमारी के समान खतरनाक है। यह बात एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने उत्तराखंड कॉर्डियाबकान कार्यशाला के दौरान कही।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में शुक्रवार को दो दिवसीय उत्तराखंड कॉर्डियाबकान 2018 कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर एम्स निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि मधुमेह जैसे रोग से मानव शरीर का कोई अंग अछूता नहीं रहता। उन्होंने प्रत्येक चिकित्सक को डायबिटीज में दक्षता हासिल करने के साथ ही समय समय पर अपनी योग्यता का पुनरावलोकन करने की सलाह दी। इसके अलावा शुगर का कंट्रोल खाली व भरे पेट के आधार पर करने की बजाए ग्लाइकेटेड हिमोग्लोबिन एचबीए 1सी पद्धति से करने को कहा। संस्थान की डीन प्रो. सुरेखा किशोर ने कहा कि भारत जैसे देश में सामुदायिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
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कार्यशाला के पहले दिन डॉ. यश श्रीवास्तव ने कनिष्ठ चिकित्सकों को इकोकार्डियोग्राफी का बेसिक व एडवांस प्रशिक्षण दिया। डॉ. वरुण कुमार ने बताया कि फोर डी इकोकार्डियोग्राफी देश के चुनिंदा अस्पतालों में उपलब्ध है, जिनमें एम्स ऋषिकेश भी शामिल है। डॉ. रोहित वालिया ने इंप्लांटेबल डिफिबिलेटर, कॉर्डियक रिसिकुनाइजेशन थैरेपी, लीडलैस पेसमेकर, नई पेसिंग विधि हिजबंडल पेसिंग की जानकारी दी। कार्यशाला के समन्वयक व डिवीजन ऑफ डायबिटीज एंड मेटाबॉलिज्म डॉ. रविकांत ने मधुमेह के क्षेत्र में होने वाली प्रगति जैसे इंसुलिन पंप, कंटीन्यूअस ग्लूकोज मानिटरिंग सिस्टम व अन्य चिकित्सा पद्धति पर जोर दिया। कार्यशाला में सह समन्वयक व मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी धर, कार्यक्रम सचिव डॉ. मोनिका पठानिया, सह सचिव डॉ. मुकेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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‘मैं और मेरी मधुमेह’ पुस्तक का विमोचन
ऋषिकेश। कार्यशाला के प्रथम दिन मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. रविकांत की ‘मैं और मेरी मधुमेह’ पुस्तक का लोकार्पण किया गया। इसमें मधुमेह से संबंधित विशेषज्ञों के आलेख प्रकाशित किए गए हैं। इनमें डॉ. सुरेखा किशोर, डॉ. सुरेश शर्मा, विनीता थपलियाल, डॉ. जया चतुर्वेदी, डॉ. रविन विश्नोई, डॉ. शिव वर्मा, डॉ. नीरज कुमार सिंह, डॉ. वरुण, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. मीनाक्षी धर के लेख शामिल हैं। हिंदी में प्रकाशित इस पुस्तक में डायबिटीज के मरीजों के रहन सहन, खानपान, जटिलताओं, व्यायाम व उपचार संबंधी जानकारियां हैं।