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सेना को है पहाड़ में अस्पताल की जरुरत
Updated Thu, 01 Nov 2018 10:33 PM IST
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श्रीनगर। सैन्य अधिकारी के दौरे से एक बात लगभग साफ हुई कि भले ही सेना मेडिकल कॉलेज को लेने की इच्छुक नहीं है, लेकिन सेना क्लीनिकल साइट (अस्पताल) की जरूरत को देखते हुए बेस अस्पताल के संचालन में सहयोग कर सकती है।
सेना के कर्नल सुंदरसेन ने नवनिर्मित 200 शय्याओं के भवन के निरीक्षण में पूरी रुचि दिखाई। सूत्रों के अनुसार, सेना की योजना है कि उक्त भवन को टेकओवर कर यहां सेना से जुड़े लोगों (कार्यरत सैनिक, अफसर व उनके आश्रितों) का इलाज हो। इसके एवज में सेना अस्पताल को संसाधन और डॉक्टर उपलब्ध कराएगी, जो सिविल जनता के काम भी आएंगे।
यहां बता दें कि पहाड़ में भारी संख्या में लोग सेना के तीनों अंगों में कार्यरत हैं। सेना ने उनके परिजनों के इलाज के लिए ईसीएचएस (पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) पॉलीक्लीनिक खोले हुए हैं। यहां मरीजों को सेना के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जो पहाड़ से काफी दूर होते हैं, लिहाजा सेना चाहती है कि पहाड़ में ही ऐसा अस्पताल बन जाए, जहां सेवारत व सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों व उनके आश्रितों का इलाज हो सके। इसके लिए सेना के पास दो विकल्प हैं। एक तो नया अस्पताल खोला जाए और दूसरा किसी अस्पताल के साथ संयुक्त रुप से सेना का अस्पताल संचालित किया जाए। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर मेें सेना की जरूरत के मुताबिक संसाधन मिलने की उम्मीद हैं।
सेना के कर्नल सुंदरसेन ने नवनिर्मित 200 शय्याओं के भवन के निरीक्षण में पूरी रुचि दिखाई। सूत्रों के अनुसार, सेना की योजना है कि उक्त भवन को टेकओवर कर यहां सेना से जुड़े लोगों (कार्यरत सैनिक, अफसर व उनके आश्रितों) का इलाज हो। इसके एवज में सेना अस्पताल को संसाधन और डॉक्टर उपलब्ध कराएगी, जो सिविल जनता के काम भी आएंगे।
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यहां बता दें कि पहाड़ में भारी संख्या में लोग सेना के तीनों अंगों में कार्यरत हैं। सेना ने उनके परिजनों के इलाज के लिए ईसीएचएस (पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) पॉलीक्लीनिक खोले हुए हैं। यहां मरीजों को सेना के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है, जो पहाड़ से काफी दूर होते हैं, लिहाजा सेना चाहती है कि पहाड़ में ही ऐसा अस्पताल बन जाए, जहां सेवारत व सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों व उनके आश्रितों का इलाज हो सके। इसके लिए सेना के पास दो विकल्प हैं। एक तो नया अस्पताल खोला जाए और दूसरा किसी अस्पताल के साथ संयुक्त रुप से सेना का अस्पताल संचालित किया जाए। मेडिकल कॉलेज श्रीनगर मेें सेना की जरूरत के मुताबिक संसाधन मिलने की उम्मीद हैं।
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