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परमार्थ निकेतन गंगा तट पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन

Tue, 30 Oct 2018 01:57 AM IST
Updated Tue, 30 Oct 2018 01:57 AM IST
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परमार्थ निकेतन गंगा तट पर श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
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स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन में गंगा तट पर सोमवार को साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि, गुरुकुल छारोड़ी अहमदाबाद के स्वामी माधव प्रियदास महाराज, स्वामी राम, बालकृष्ण स्वामी ने संयुक्त रूप से दीप जला कर किया। श्रीमद्भागवत कथा में गुजरात से श्रद्धालु पहुंचे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गंगा दर्शन भी किए।

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि जब-जब जीवन में संघर्ष होते हैं समस्याएं आती हैं। श्राप जैसा अभिशाप सामने आने पर भी भगवान का आश्रय व्यक्ति को सभी विषम परिस्थितियों से बचा लेता है। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित को सात दिनों में सांप डसने से मौत का श्राप ऋषि ने दिया था और कंस की मृत्यु देवकी के आठवें गर्भ से होने की आकाशवाणी हुई। आकाशवाणी सुनकर कंस सत्ता की ओर चल पड़ा और अपने काल को मारने का निश्चय किया। इसके बाद कंस ने कई योजनाएं बनाकर प्रयत्न किया, लेकिन भगवान कृष्ण प्रकट हुए और कंस का अंत कर दिया। वहीं दूसरी ओर राजा परीक्षित ने राजा होते हुए भी सत्ता की बजाय सत्य की शरण में गए। कंस और राजा परीक्षित दोनों राजा थे, लेकिन कंस पर कुसंग का असर था और राजा परीक्षित पर सत्संग का असर था। इस दौरान यजमान परिवार के सदस्य भिक्खु भाई, घनश्याम भाई, बहादुर सिंह आदि मौजूद रहे।
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