{"_id":"5bd34a9fbdec2269490070b8","slug":"154057381815104-karnpryag-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"104 साल पहले पड़ गई थी कर्णप्रयाग में स्कूल की नींव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
104 साल पहले पड़ गई थी कर्णप्रयाग में स्कूल की नींव
Updated Fri, 26 Oct 2018 10:40 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कर्णप्रयाग। चमोली जिले के केंद्र बिंदु में शिक्षा के नए आयाम की स्थापना की पटकथा आज से 104 साल पहले फ्रांस में 33 साल के युवा ने लिख दी थी। तब कर्णप्रयाग अपर गढ़वाल के पिछले हिस्से के तौर पर जाना जाता था। यहां शिक्षा के लिए दूर-दूर तक स्कूल नहीं थे। ऐसे में गढ़वाल राइफल के जवान दरवान ने वीरता के लिए पुरस्कार में कर्णप्रयाग के लिए स्कूल और कर्णप्रयाग तक यातायात और विकास के लिए रेल लाइन की मांग की। इसके बाद यहां स्कूल खुला, जो आज अपने 100 साल पूरे कर शताब्दी वर्ष मना रहा है।
आयोजन समिति के सचिव भुवन नौटियाल कहते हैं कि नारायणबगड़ ब्लाक के कफारतीर गांव में वर्ष 1981 में जन्मे दरवान सिंह नेगी गढ़वाल राइफल में जवान थे। प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों की ओर से लड़ते हुए दरबान सिंह ने वीरता का परिचय दिया था। तब पांच दिसंबर 1914 को फ्रांस में ही युद्ध के मैदान में सर जार्ज पंचम ने दरवान को विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित करते हुए पुरस्कार मांगने के लिए कहा। तब 33 साल के इस युवा ने कर्णप्रयाग में स्कूल और कर्णप्रयाग तक रेल लाइन की मांग की थी। वर्ष 1918 में कर्णप्रयाग में वर्नाकुलर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल की स्थापना की गई, जो वर्ष 1943 में हाईस्कूल और वर्ष 1952 में इंटरमीडिएट बना।
आयोजन समिति के सचिव भुवन नौटियाल कहते हैं कि नारायणबगड़ ब्लाक के कफारतीर गांव में वर्ष 1981 में जन्मे दरवान सिंह नेगी गढ़वाल राइफल में जवान थे। प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों की ओर से लड़ते हुए दरबान सिंह ने वीरता का परिचय दिया था। तब पांच दिसंबर 1914 को फ्रांस में ही युद्ध के मैदान में सर जार्ज पंचम ने दरवान को विक्टोरिया क्रॉस से सम्मानित करते हुए पुरस्कार मांगने के लिए कहा। तब 33 साल के इस युवा ने कर्णप्रयाग में स्कूल और कर्णप्रयाग तक रेल लाइन की मांग की थी। वर्ष 1918 में कर्णप्रयाग में वर्नाकुलर अंग्रेजी माध्यम के स्कूल की स्थापना की गई, जो वर्ष 1943 में हाईस्कूल और वर्ष 1952 में इंटरमीडिएट बना।
विज्ञापन