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काउंसलिंग से होगा कमजोर बच्चों का बौद्धिक विकास
Updated Fri, 26 Oct 2018 02:01 AM IST
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- स्कूलों में बच्चों की विस्तृत रिपोर्ट करवाई जा रही है तैयार
ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। पढ़ाई में कमजोर बच्चों का बौद्धिक स्तर बढ़ाने के लिए अब स्कूलों में अलग से काउंसिलिंग की व्यवस्था होगी। विद्यालय के शिक्षक पता करेंगे कि आखिर बच्चा कहां पर कमजोर है, इसके बाद उसकी रिपोर्ट बनाकर डॉयरेक्टर व ज्वाइंट डॉयरेक्टर को भेजी जाएगी। केंद्रीय तिब्बती विद्यालय हरबर्टपुर पहुंचे सेंट्रल तिब्बतन स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीएसए) दिल्ली के ज्वाइंट डायरेक्टर एएस रावत ने यह जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि कक्षा में जो विद्यार्थी कमजोर होता है, उसके प्रति अध्यापकों व परिजनों का व्यवहार अच्छा नहीं होता। बच्चा खुद को अन्य बच्चों के मुकाबले कमजोर समझने लगता है, जिसके कारण वह परीक्षा में अच्छे परिणाम नहीं ला सकता। यदि बच्चे के कमजोर पहलुओं की तरफ ध्यान दिया जाए और उस परेशानी का निराकरण किया जाए तो वह बच्चा भी अन्य बच्चों की तरह पढ़ाई करने में आगे हो सकता है। यही नियम स्कूलों में लागू किया जा रहा है। हर स्कूल स्टाफ को कमजोर बच्चों की मॉनीटरिंग करने को कहा गया है। पता लगाया जाएगा कि आखिर वह कमजोर क्यों है। बच्चे की समस्या का पता करके उसमें सुधार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग करने के बाद मसूरी व हरबर्टपुर स्कूल के कुछ बच्चों में काफी सुधार आया है।
लिखने की क्षमता भी बढ़ाएंगे
ज्वाइंट डॉयरेक्टर ने कहा कि स्कूलों में अध्यापकों का ध्यान बच्चों की पढ़ाई में अधिक रहता है, जिसके कारण बच्चों की लिखने की क्षमता कम रहती है। परीक्षा में वह निर्धारित समय के दौरान पूरे सवाल नहीं लिख पाते। इसलिए अब बच्चों की लिखने की क्षमता की तरफ भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा व ओपन जिम शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। पढ़ाई में कमजोर बच्चों का बौद्धिक स्तर बढ़ाने के लिए अब स्कूलों में अलग से काउंसिलिंग की व्यवस्था होगी। विद्यालय के शिक्षक पता करेंगे कि आखिर बच्चा कहां पर कमजोर है, इसके बाद उसकी रिपोर्ट बनाकर डॉयरेक्टर व ज्वाइंट डॉयरेक्टर को भेजी जाएगी। केंद्रीय तिब्बती विद्यालय हरबर्टपुर पहुंचे सेंट्रल तिब्बतन स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीएसए) दिल्ली के ज्वाइंट डायरेक्टर एएस रावत ने यह जानकारी दी है।
उन्होंने कहा कि कक्षा में जो विद्यार्थी कमजोर होता है, उसके प्रति अध्यापकों व परिजनों का व्यवहार अच्छा नहीं होता। बच्चा खुद को अन्य बच्चों के मुकाबले कमजोर समझने लगता है, जिसके कारण वह परीक्षा में अच्छे परिणाम नहीं ला सकता। यदि बच्चे के कमजोर पहलुओं की तरफ ध्यान दिया जाए और उस परेशानी का निराकरण किया जाए तो वह बच्चा भी अन्य बच्चों की तरह पढ़ाई करने में आगे हो सकता है। यही नियम स्कूलों में लागू किया जा रहा है। हर स्कूल स्टाफ को कमजोर बच्चों की मॉनीटरिंग करने को कहा गया है। पता लगाया जाएगा कि आखिर वह कमजोर क्यों है। बच्चे की समस्या का पता करके उसमें सुधार किया जाएगा। उन्होंने बताया कि काउंसिलिंग करने के बाद मसूरी व हरबर्टपुर स्कूल के कुछ बच्चों में काफी सुधार आया है।
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लिखने की क्षमता भी बढ़ाएंगे
ज्वाइंट डॉयरेक्टर ने कहा कि स्कूलों में अध्यापकों का ध्यान बच्चों की पढ़ाई में अधिक रहता है, जिसके कारण बच्चों की लिखने की क्षमता कम रहती है। परीक्षा में वह निर्धारित समय के दौरान पूरे सवाल नहीं लिख पाते। इसलिए अब बच्चों की लिखने की क्षमता की तरफ भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा स्कूलों में सीसीटीवी कैमरा व ओपन जिम शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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