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जीआईसी पीपलीधार के दिन बहुरेंगे
Updated Mon, 08 Oct 2018 09:48 PM IST
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श्रीनगर। विकासखंड कीर्तिनगर में स्थित राजकीय इंटर कॉलेज पीपलीधार डागर के दिन जल्द बहुरेंगे। नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक) के वित्तीय सहयोग से स्कूल भवन का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। निर्माण का जिम्मा उत्तराखंड पेयजल निगम को दिया गया है। निगम ने इसके लिए सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है।
प्रदेश में नाबार्ड ग्रामीण अवस्थापना विकास निधि (आरआइडीएफ) से 11 सरकारी विद्यालयों को पुनर्निर्माण के लिए मदद दे रहा है। इसमें टिहरी जिले में स्थित जीआईसी पीपलीधार भी शामिल है। विद्यालय के भवन को लगभग चार दशक हो चुके हैं। कक्षा-कक्षों की स्थिति यह है कि बारिश होने पर छत टपकने लगती है। विद्यालय प्रशासन की ओर से हर साल भवन पुनर्निर्माण के लिए बजट मांगा जाता था, लेकिन हर बार हाथ खाली रह जाते थे। सरकार से कुछ मदद न मिलने और छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य अनिल कुमार पांडे, शिक्षक जसवंत लाल व किशोरी सिंह ने पहल करते हुए अपनी जेब से कक्षा कक्षों की मरम्मत का बीड़ा उठाया। उनकी पहल को देखते हुए ग्रामीणों ने भी दान दिया। अमर उजाला ने 11 जून के अंक में स्कूल भवन की हालत सुधारने को शिक्षक और ग्रामीण आए आगे शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था। काफी कोशिशों के बाद शासन ने पुनर्निर्माण की मंजूरी दे दी। नाबार्ड की ओर से भवन निर्माण के लिए 85.40 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। बीते सितंबर माह में प्रथम किश्त के तौर पर लगभग 25 लाख रुपये जल निगम को रिलीज भी हो गए हैं। प्रधानाचार्य पांडे ने बताया कि जल निगम की टीम दो दिन तक सर्वेक्षण करने के बाद लौट गई।
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प्रदेश में नाबार्ड ग्रामीण अवस्थापना विकास निधि (आरआइडीएफ) से 11 सरकारी विद्यालयों को पुनर्निर्माण के लिए मदद दे रहा है। इसमें टिहरी जिले में स्थित जीआईसी पीपलीधार भी शामिल है। विद्यालय के भवन को लगभग चार दशक हो चुके हैं। कक्षा-कक्षों की स्थिति यह है कि बारिश होने पर छत टपकने लगती है। विद्यालय प्रशासन की ओर से हर साल भवन पुनर्निर्माण के लिए बजट मांगा जाता था, लेकिन हर बार हाथ खाली रह जाते थे। सरकार से कुछ मदद न मिलने और छात्र-छात्राओं के भविष्य को देखते हुए स्कूल के प्रधानाचार्य अनिल कुमार पांडे, शिक्षक जसवंत लाल व किशोरी सिंह ने पहल करते हुए अपनी जेब से कक्षा कक्षों की मरम्मत का बीड़ा उठाया। उनकी पहल को देखते हुए ग्रामीणों ने भी दान दिया। अमर उजाला ने 11 जून के अंक में स्कूल भवन की हालत सुधारने को शिक्षक और ग्रामीण आए आगे शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था। काफी कोशिशों के बाद शासन ने पुनर्निर्माण की मंजूरी दे दी। नाबार्ड की ओर से भवन निर्माण के लिए 85.40 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। बीते सितंबर माह में प्रथम किश्त के तौर पर लगभग 25 लाख रुपये जल निगम को रिलीज भी हो गए हैं। प्रधानाचार्य पांडे ने बताया कि जल निगम की टीम दो दिन तक सर्वेक्षण करने के बाद लौट गई।
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