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योगेंद्र नारायण गढ़वाल विवि के कुलाधिपति नियुक्त
Updated Sat, 06 Oct 2018 09:48 PM IST
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श्रीनगर। पूर्व आईएएस डा. योगेंद्र नारायण को गढ़वाल केंद्रीय विवि का कुलाधिपति (चांसलर) नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति पांच साल के लिए की गई है। कुलाधिपति की नियुक्ति संबंधी सूचना एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) से विवि प्रशासन को भी मिल चुकी है। योगेंद्र नारायण गढ़वाल केंद्रीय विवि के दूसरे कुलाधिपति हैं। कुलाधिपति का पद करीब एक वर्ष से रिक्त चल रहा था। कुलाधिपति की नियुक्ति पर विवि के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों ने खुशी जताई है।
डा. योगेंद्र नारायण 1965 बैच के उत्तरप्रदेश कैडर के आईएएस हैं। डा. नारायण 42 वर्ष तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहे। सरकारी नौकरी में रहते हुए इन्होंने डेवलपमेंट इकोनोमिक्स में डिप्लोमा के साथ एमफिल व पीएचडी भी की। साथ ही प्रशासनिक सेवा से संबधित कई पुस्तकें भी लिखी हैं। डा. नारायण ग्रेटर नोएडा के पहले चेयरमैन व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पहले अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गढ़वाल विवि के कुलाधिपति (चांसलर) पद के लिए जनवरी में विवि की कार्य परिषद ने तीन नामों का पैनल एमएचआरडी को भेजा था, जिसमें डा. नारायण का नाम शामिल था। कुलाधिपति की नियुक्ति पर विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, कुलसचिव डा. एके झा, वित्त अधिकारी प्रो. एनएस पंवार, डीएसडब्लयू प्रो. पीएस राणा, मुख्य नियंता प्रो. अरुण बहुगुणा आदि ने खुशी जताई है।
विवि मे सर्वोच्च पद होता है कुलाधिपति
श्रीनगर। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति का पद सर्वोच्च होता है। दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति के हाथों ही उपाधियों का वितरण किया जाता है। विवि की ओर से दी जाने वाली मानद उपाधि भी कुलाधिपति के हाथों दी जाती है। कुलाधिपति विवि की कोर्ट का चेयरपर्सन होते हैं। किसी भी विवाद पर इनकी सहमति आवश्यक होती है। कुलाधिपति विवि प्रशासन की ओर से लिए गए किसी भी निर्णय पर पुर्न विचार करने के लिए कह सकते हैं।
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डा. योगेंद्र नारायण 1965 बैच के उत्तरप्रदेश कैडर के आईएएस हैं। डा. नारायण 42 वर्ष तक भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहे। सरकारी नौकरी में रहते हुए इन्होंने डेवलपमेंट इकोनोमिक्स में डिप्लोमा के साथ एमफिल व पीएचडी भी की। साथ ही प्रशासनिक सेवा से संबधित कई पुस्तकें भी लिखी हैं। डा. नारायण ग्रेटर नोएडा के पहले चेयरमैन व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के पहले अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गढ़वाल विवि के कुलाधिपति (चांसलर) पद के लिए जनवरी में विवि की कार्य परिषद ने तीन नामों का पैनल एमएचआरडी को भेजा था, जिसमें डा. नारायण का नाम शामिल था। कुलाधिपति की नियुक्ति पर विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल, कुलसचिव डा. एके झा, वित्त अधिकारी प्रो. एनएस पंवार, डीएसडब्लयू प्रो. पीएस राणा, मुख्य नियंता प्रो. अरुण बहुगुणा आदि ने खुशी जताई है।
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विवि मे सर्वोच्च पद होता है कुलाधिपति
श्रीनगर। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति का पद सर्वोच्च होता है। दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति के हाथों ही उपाधियों का वितरण किया जाता है। विवि की ओर से दी जाने वाली मानद उपाधि भी कुलाधिपति के हाथों दी जाती है। कुलाधिपति विवि की कोर्ट का चेयरपर्सन होते हैं। किसी भी विवाद पर इनकी सहमति आवश्यक होती है। कुलाधिपति विवि प्रशासन की ओर से लिए गए किसी भी निर्णय पर पुर्न विचार करने के लिए कह सकते हैं।
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