{"_id":"5bb8e069867a55687855e9a9","slug":"153884270617-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रंगकर्मी पुरोहित के सम्मान में हुआ कवि सम्मेलन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रंगकर्मी पुरोहित के सम्मान में हुआ कवि सम्मेलन
Updated Sat, 06 Oct 2018 09:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। बिगुल संस्था की ओर से संस्कृति कर्मी, रंगकर्मी और हाल में गढ़वाल विवि के अंग्रेजी विभाग से सेवानिवृत्त प्रो. डीआर पुरोहित के सम्मान में जीजीआईसी में कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया।
शुक्रवार देर शाम आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता जयकृष्ण पैन्यूली और संचालन संदीप रावत ने किया। कवयित्री शिवांगी खंडूड़ी ने काव्य पाठ किया। दिनेश फोंदड़ी ने वो सावन की रिमझिम वो बारिश का पानी, वो तारों की टिमटिम, डा. अशोक बडोनी ने बंदूकें उगल रहीं हैं आग आज धरती के स्वर्ग पर, आरती पुंडीर ने जिंदगी जब तक तूफानों से दो चार नहीं होती, जीवन नय्या साहिलों के पार नहीं होती, साइनी उनियाल ने नन्हा बालक मां से बोला पापा कब आएंगे, संदीप रावत ने कागज सी मी सर्र रूझी ग्यूं तेरी छाली माया मा और जयकृष्ण पैन्यूली ने मछलियों का अब रेत पर तैरने का वक्त आ गया कविता सुनाई। दिलवर रावत, ओमप्रकाश सैलानी व शिशुपाल चौधरी ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर हेमा खंडूड़ी, सुमन देवली, सुबोधिनी खंडूड़ी, संस्था के संरक्षक डा. एमएन गैरोला, त्रिलोक दर्शन थपलियाल, शैलेंद्र तिवाड़ी, देवेंद्र उनियाल, शरद लिंगवाल, परशुराम भट्ट और जगदीश रावत आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
शुक्रवार देर शाम आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता जयकृष्ण पैन्यूली और संचालन संदीप रावत ने किया। कवयित्री शिवांगी खंडूड़ी ने काव्य पाठ किया। दिनेश फोंदड़ी ने वो सावन की रिमझिम वो बारिश का पानी, वो तारों की टिमटिम, डा. अशोक बडोनी ने बंदूकें उगल रहीं हैं आग आज धरती के स्वर्ग पर, आरती पुंडीर ने जिंदगी जब तक तूफानों से दो चार नहीं होती, जीवन नय्या साहिलों के पार नहीं होती, साइनी उनियाल ने नन्हा बालक मां से बोला पापा कब आएंगे, संदीप रावत ने कागज सी मी सर्र रूझी ग्यूं तेरी छाली माया मा और जयकृष्ण पैन्यूली ने मछलियों का अब रेत पर तैरने का वक्त आ गया कविता सुनाई। दिलवर रावत, ओमप्रकाश सैलानी व शिशुपाल चौधरी ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर हेमा खंडूड़ी, सुमन देवली, सुबोधिनी खंडूड़ी, संस्था के संरक्षक डा. एमएन गैरोला, त्रिलोक दर्शन थपलियाल, शैलेंद्र तिवाड़ी, देवेंद्र उनियाल, शरद लिंगवाल, परशुराम भट्ट और जगदीश रावत आदि मौजूद थे।
विज्ञापन