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ल्वाणी पहुंची नंदा लोक जात यात्रा
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:29 PM IST
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कर्णप्रयाग/नारायणबगड़/गैरसैंण। नंदा अष्टमी पर्व पर कर्णप्रयाग, नारायणबगड़ और गैरसैंण में श्रद्धालुओं ने मां नंदा की पूजा अर्चना की। कर्णप्रयाग के बणसोली गांव में 55 साल बाद नंदा अष्टमी की पाती का आयोजन किया गया। भक्तों ने मां नंदा को नए अनाज की बाली का भोग लगाया।
बणसोली गांव में आयोजित नंदा अष्टमी पर्व पर ग्रामीणों ने नंदा देवी, देवराड़ी देवी और लाटू देवता की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की। देवी देवताओं के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया और ग्रामीणों व ध्याणियों ने मां नंदा को नए अनाज की बाली, भोग प्रसाद और वस्त्र आभूषण अर्पित किए। क्षेत्र पंचायत सदस्य महिपाल सिंह नेगी और गोपाल दत्त थपलियाल ने बताया कि रायशुमारी नहीं होने और अन्य कारणों के चलते 55 साल तक नंदा अष्टमी की पाती का आयोजन नहीं हो पाया था। वहीं सिलंगी में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के सातवें दिन देवी देवताओं की पूजा की गई। नारायणबगड़ के सनेड़ गांव में आयोजित चार दिवसीय मां नंदा देवी बेडूपाती कौथिक का देवी की कैलाश विदाई के साथ समापन हो गया। रविवार रात्रि को आयोजित जागरण में श्रद्धालुओं ने खेरालिंग खांकर विनसर महादेव मंदिर परिसर में भजन और मांगल-जागरों से देवी देवताओं की स्तुति की। ब्रह्ममुहूर्त में आचार्य विशंबर प्रसाद सती ने दुर्गा सप्तशती और रुद्राष्टक मंत्रों से मां नंदा देवी, भगवान भोलेनाथ और क्षेत्रपाल देवताओं की पूजा की। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख अंशी नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य हरेंद्र बिष्ट, प्रधान शिशपाल सिंह सहित कई ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। वहीं गैरसैंण के पज्याणा, धारापाणी, एखोला आदि गांवों में मां नंदा देवी के पाती स्तंभ की पूजा के साथ पाती महोत्सव का समापन हुआ।
मां नंदा को नए अनाज की बाली भेंट की
कर्णप्रयाग। डिम्मर गांव में ग्रामीणों ने श्री लक्ष्मी नारायण भगवान और मां नंदा देवी की पूजा कर नंदा अष्टमी की पाती का आयोजन किया। ब्रह्ममुहूर्त से आचार्यों ने श्री लक्ष्मी नारायण भगवान, चंडी माई, खांडू देवता और नंदा देवी की पूजा की। इसके बाद देवी देवताओं के पश्वाओं की अगुवानी में महिलाएं लक्ष्मी नारायण मंदिर से रिंगाल की टोकरियों में रोंट, आरसे, वस्त्र और आभूषण लेकर निकलीं और खेतों में जाकर मां नंदा को नए अनाज की बाली भेंट की। इसके बाद श्रद्धालु मां नंदा को पौराणिक चौंरी चौक में आए। पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद डिमरी, डिम्मर-उमट्टा धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, आचार्य गणेश चंद्र खंडूड़ी, जीपी डिमरी, द्वारिका प्रसाद डिमरी, मोहन प्रसाद डिमरी, महिला मंगल दल अध्यक्ष सरिता देवी, नरेश खंडूड़ी सहित डिम्मर, सैंण, भभराड़ी, माखोली, खिल, सुमल्टा आदि स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।
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फोटो
ल्वाणी और वांक गांव पहुंची मां नंदा की लोकजात यात्रा
देवाल। वांक गांव में पूजा के बाद नंदा लोकजात यात्रा सोमवार को रात्रि विश्राम के लिए ल्वाणी गांव पहुंची, जबकि मंगलवार को यात्रा उलंग्रा पहुंचेगी। वहीं 16 सितंबर को वेदनी में पूजा के बाद नंदा लोकजात यात्रा रविवार को वापस वांक गांव पहुंची। वांक गांव पहुंची डोली का ग्रामीणों ने स्वागत किया।
सोमवार सुबह पूजा के बाद नंदा लोकजात यात्रा मुंदोली और हरनी गांव होते हुए रात्रि प्रवास के लिए ल्वाणी गांव पहुंची। हरनी और ल्वाणी में देवी की डोली पहुंचने पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान मुंदोली और हरनी में अष्टमी मेले का आयोजन भी किया गया। यहां नंदा की डोली की पूजा के साथ ही अष्टमी मेले का समापन भी हो गया है। इस मौके पर प्रधान कमला देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बच्ची राम, लक्ष्मण बिष्ट, लखपत बिष्ट, ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट, रेंजर टीएस बिष्ट, प्रधान महेशी देवी, महाबीर बिष्ट, सुरेंद्र सिंह, गंगा सिंह, हीरा रूपकुंडी, लक्ष्मण सिंह, मान सिंह, हयात सिंह बिष्ट, भूपेंद्र सिंह और विमला देवी आदि मौजूद थे।
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कालिंका देवी को ससुराल किया विदा
गौचर। दो दिनों तक मायके हवाई पट्टी स्थित पनाई सेरा कालिंका मंदिर में रहने के बाद क्षेत्र की ईष्ट देवी कालिंका अपने ससुराल भटनगर के लिए विदा हुईं। इस दौरान देवी भक्तों ने ढोल नगाड़ों, पुष्प वर्षा और वैदिक मंत्रोचार के साथ आराध्य देवी को ससुराल के लिए विदा किया।
भटनगर की कालिंका देवी शनिवार को अपने भाई रावलनगर के लाटू देवता की अगुवाई में मायके पनाई सेरा स्थित कालिंका मंदिर पहुंचीं थीं। दो दिनों तक मंदिर में मायके पक्ष (पनाई, बंदरखंड, रावलगनर सहित सात गांव) की ध्याणियों और ग्रामीणों ने भजन-कीर्तन के साथ देवी की आराधना की। सोमवार को दिनभर चली पूजा के बाद भक्तों ने पुष्पवर्षा के साथ कालिंका देवी को नम आंखों से ससुराल भटनगर के लिए विदा किया। कालिंका देवी को ससुराल विदा करने के बाद रावलनगर के लाटू देवता को भक्तों ने रावलनगर मंदिर पहुंचाया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष दलबीर कनवासी, अनिल नेगी और राजीव चौहान सहित ग्रामीण मौजूद थे।
बणसोली गांव में आयोजित नंदा अष्टमी पर्व पर ग्रामीणों ने नंदा देवी, देवराड़ी देवी और लाटू देवता की वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पूजा की। देवी देवताओं के पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया और ग्रामीणों व ध्याणियों ने मां नंदा को नए अनाज की बाली, भोग प्रसाद और वस्त्र आभूषण अर्पित किए। क्षेत्र पंचायत सदस्य महिपाल सिंह नेगी और गोपाल दत्त थपलियाल ने बताया कि रायशुमारी नहीं होने और अन्य कारणों के चलते 55 साल तक नंदा अष्टमी की पाती का आयोजन नहीं हो पाया था। वहीं सिलंगी में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के सातवें दिन देवी देवताओं की पूजा की गई। नारायणबगड़ के सनेड़ गांव में आयोजित चार दिवसीय मां नंदा देवी बेडूपाती कौथिक का देवी की कैलाश विदाई के साथ समापन हो गया। रविवार रात्रि को आयोजित जागरण में श्रद्धालुओं ने खेरालिंग खांकर विनसर महादेव मंदिर परिसर में भजन और मांगल-जागरों से देवी देवताओं की स्तुति की। ब्रह्ममुहूर्त में आचार्य विशंबर प्रसाद सती ने दुर्गा सप्तशती और रुद्राष्टक मंत्रों से मां नंदा देवी, भगवान भोलेनाथ और क्षेत्रपाल देवताओं की पूजा की। इस मौके पर ब्लॉक प्रमुख अंशी नेगी, क्षेत्र पंचायत सदस्य हरेंद्र बिष्ट, प्रधान शिशपाल सिंह सहित कई ग्रामीणों ने प्रतिभाग किया। वहीं गैरसैंण के पज्याणा, धारापाणी, एखोला आदि गांवों में मां नंदा देवी के पाती स्तंभ की पूजा के साथ पाती महोत्सव का समापन हुआ।
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मां नंदा को नए अनाज की बाली भेंट की
कर्णप्रयाग। डिम्मर गांव में ग्रामीणों ने श्री लक्ष्मी नारायण भगवान और मां नंदा देवी की पूजा कर नंदा अष्टमी की पाती का आयोजन किया। ब्रह्ममुहूर्त से आचार्यों ने श्री लक्ष्मी नारायण भगवान, चंडी माई, खांडू देवता और नंदा देवी की पूजा की। इसके बाद देवी देवताओं के पश्वाओं की अगुवानी में महिलाएं लक्ष्मी नारायण मंदिर से रिंगाल की टोकरियों में रोंट, आरसे, वस्त्र और आभूषण लेकर निकलीं और खेतों में जाकर मां नंदा को नए अनाज की बाली भेंट की। इसके बाद श्रद्धालु मां नंदा को पौराणिक चौंरी चौक में आए। पश्वाओं ने श्रद्धालुओं को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दिया। इस मौके पर राजेंद्र प्रसाद डिमरी, डिम्मर-उमट्टा धार्मिक पंचायत के अध्यक्ष आशुतोष डिमरी, आचार्य गणेश चंद्र खंडूड़ी, जीपी डिमरी, द्वारिका प्रसाद डिमरी, मोहन प्रसाद डिमरी, महिला मंगल दल अध्यक्ष सरिता देवी, नरेश खंडूड़ी सहित डिम्मर, सैंण, भभराड़ी, माखोली, खिल, सुमल्टा आदि स्थानों से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे।
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ल्वाणी और वांक गांव पहुंची मां नंदा की लोकजात यात्रा
देवाल। वांक गांव में पूजा के बाद नंदा लोकजात यात्रा सोमवार को रात्रि विश्राम के लिए ल्वाणी गांव पहुंची, जबकि मंगलवार को यात्रा उलंग्रा पहुंचेगी। वहीं 16 सितंबर को वेदनी में पूजा के बाद नंदा लोकजात यात्रा रविवार को वापस वांक गांव पहुंची। वांक गांव पहुंची डोली का ग्रामीणों ने स्वागत किया।
सोमवार सुबह पूजा के बाद नंदा लोकजात यात्रा मुंदोली और हरनी गांव होते हुए रात्रि प्रवास के लिए ल्वाणी गांव पहुंची। हरनी और ल्वाणी में देवी की डोली पहुंचने पर ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। इस दौरान मुंदोली और हरनी में अष्टमी मेले का आयोजन भी किया गया। यहां नंदा की डोली की पूजा के साथ ही अष्टमी मेले का समापन भी हो गया है। इस मौके पर प्रधान कमला देवी, क्षेत्र पंचायत सदस्य बच्ची राम, लक्ष्मण बिष्ट, लखपत बिष्ट, ब्लाक प्रमुख उर्मिला बिष्ट, रेंजर टीएस बिष्ट, प्रधान महेशी देवी, महाबीर बिष्ट, सुरेंद्र सिंह, गंगा सिंह, हीरा रूपकुंडी, लक्ष्मण सिंह, मान सिंह, हयात सिंह बिष्ट, भूपेंद्र सिंह और विमला देवी आदि मौजूद थे।
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कालिंका देवी को ससुराल किया विदा
गौचर। दो दिनों तक मायके हवाई पट्टी स्थित पनाई सेरा कालिंका मंदिर में रहने के बाद क्षेत्र की ईष्ट देवी कालिंका अपने ससुराल भटनगर के लिए विदा हुईं। इस दौरान देवी भक्तों ने ढोल नगाड़ों, पुष्प वर्षा और वैदिक मंत्रोचार के साथ आराध्य देवी को ससुराल के लिए विदा किया।
भटनगर की कालिंका देवी शनिवार को अपने भाई रावलनगर के लाटू देवता की अगुवाई में मायके पनाई सेरा स्थित कालिंका मंदिर पहुंचीं थीं। दो दिनों तक मंदिर में मायके पक्ष (पनाई, बंदरखंड, रावलगनर सहित सात गांव) की ध्याणियों और ग्रामीणों ने भजन-कीर्तन के साथ देवी की आराधना की। सोमवार को दिनभर चली पूजा के बाद भक्तों ने पुष्पवर्षा के साथ कालिंका देवी को नम आंखों से ससुराल भटनगर के लिए विदा किया। कालिंका देवी को ससुराल विदा करने के बाद रावलनगर के लाटू देवता को भक्तों ने रावलनगर मंदिर पहुंचाया। इस दौरान आयोजन समिति के अध्यक्ष दलबीर कनवासी, अनिल नेगी और राजीव चौहान सहित ग्रामीण मौजूद थे।