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सभी धर्म एक मंच पर आएं तो सशक्त होगा होगा राष्ट्र : राज्यपाल
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन में हिमालय दिवस पर आयोजित हिमालय चिंतन मंथन शिखर सम्मेलन में सूबे की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि गंगा और हिमालय अटूट आस्था के केंद्र हैं। सदियों से हिमालय ने भारत की संस्कृति, संस्कार, आध्यात्म और मानव जीवन को सुरक्षित और संरक्षित किया है। उनका कहना है कि सभी धर्म एक मंच पर आएं तो निश्चित तौर पर भारत सशक्त राष्ट्र बन सकता है। राज्यपाल ने अनावश्यक मानवीय दखल से हिमालय के अस्तित्व को खतरा करार दिया, इसके लिए लोगों से प्रकृति के अनियोजित दोहन की प्रवृत्ति छोड़ने का आह्वान किया।
रविवार को परमार्थ निकेतन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने हिमालय चिंतन मंथन शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के बाद वह आश्रम के गंगा घाट पर सांध्यकालीन आरती में शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हिमालय की गरिमा का गुणगान करना मानवीय सोच और शब्दों से परे है। राज्यपाल मौर्य ने कहा कि वर्तमान समय में मानवीय गतिविधियों के कारण हिमालय का अस्तित्व और हिमालय की संपदा दोनों खतरे में हैं। इसके लिए हमें अपनी विकासपरक गतिविधियों को प्रकृति के अनुरूप करना होगा। उनका कहना है कि हिमालय हमारी सुरक्षा सदियों से करता आ रहा है, अब हमें उसकी सुरक्षा का संकल्प लेना होगा। हिमालय के संरक्षण से ही आने वाली पीढ़ियां भी इसका लाभ ले पाएंगी। इस दौरान राज्यपाल ने उत्तराखंड में प्लास्टिक पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हिमालय और गंगा के दर्शन को आने वाले सैलानियों को यहां प्लास्टिक लेकर नहीं कपड़े के थैले लेकर आना चाहिए।
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रविवार को परमार्थ निकेतन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने हिमालय चिंतन मंथन शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के बाद वह आश्रम के गंगा घाट पर सांध्यकालीन आरती में शामिल हुईं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि हिमालय की गरिमा का गुणगान करना मानवीय सोच और शब्दों से परे है। राज्यपाल मौर्य ने कहा कि वर्तमान समय में मानवीय गतिविधियों के कारण हिमालय का अस्तित्व और हिमालय की संपदा दोनों खतरे में हैं। इसके लिए हमें अपनी विकासपरक गतिविधियों को प्रकृति के अनुरूप करना होगा। उनका कहना है कि हिमालय हमारी सुरक्षा सदियों से करता आ रहा है, अब हमें उसकी सुरक्षा का संकल्प लेना होगा। हिमालय के संरक्षण से ही आने वाली पीढ़ियां भी इसका लाभ ले पाएंगी। इस दौरान राज्यपाल ने उत्तराखंड में प्लास्टिक पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने कहा कि हिमालय और गंगा के दर्शन को आने वाले सैलानियों को यहां प्लास्टिक लेकर नहीं कपड़े के थैले लेकर आना चाहिए।
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