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अप्रवासी भारतीय दल ने किया देवप्रयाग का भ्रमण
Updated Fri, 07 Sep 2018 01:34 AM IST
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अप्रवासी भारतीय दल ने किया देवप्रयाग का भ्रमण
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि की अगुवाई में अप्रवासी भारतीय दल के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को देवप्रयाग का भ्रमण किया। इसके साथ ही दल ने देवप्रयाग स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की शाखा का भ्रमण किया।
स्वामी चिदानंद मुनि के साथ अप्रवासीय भारतीय दल के सदस्य, परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार और आश्रम के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को देवप्रयाग में स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ प्राचीन श्रीरघुनाथ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, पौधरोपण करने व वातावरण प्रदूषण मुक्त बनाने पर चर्चा की गई। इसके अलावा गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन की ओर से क्षेत्र में जैविक शौचालय के निर्माण का भरोसा भी दिया गया।
राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की शाखा में पौधरोपण के दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदियों के संगम पर रहने वालों को ईश्वर का विशेष वरदान प्राप्त है। उन्हें स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल, देवात्मा हिमालय और गंगा की पवित्रता वरदान में मिली है। हमें हिमालय जैसी विशालता, गंगा जैसी पवित्रता और सागर जैसी गहराई लिए जीवन में आगे बढ़ते हुए और पूरे विश्व में संदेश देना चाहिए।
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि की अगुवाई में अप्रवासी भारतीय दल के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को देवप्रयाग का भ्रमण किया। इसके साथ ही दल ने देवप्रयाग स्थित राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की शाखा का भ्रमण किया।
स्वामी चिदानंद मुनि के साथ अप्रवासीय भारतीय दल के सदस्य, परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमार और आश्रम के सदस्यों ने बृहस्पतिवार को देवप्रयाग में स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ प्राचीन श्रीरघुनाथ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण, पौधरोपण करने व वातावरण प्रदूषण मुक्त बनाने पर चर्चा की गई। इसके अलावा गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन की ओर से क्षेत्र में जैविक शौचालय के निर्माण का भरोसा भी दिया गया।
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राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान की शाखा में पौधरोपण के दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने कहा कि देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदियों के संगम पर रहने वालों को ईश्वर का विशेष वरदान प्राप्त है। उन्हें स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल, देवात्मा हिमालय और गंगा की पवित्रता वरदान में मिली है। हमें हिमालय जैसी विशालता, गंगा जैसी पवित्रता और सागर जैसी गहराई लिए जीवन में आगे बढ़ते हुए और पूरे विश्व में संदेश देना चाहिए।
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