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जच्चा और बच्चा को नहीं मिल पा रही ‘खुशियों की सवारी’
Updated Fri, 03 Aug 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
जनजातीय क्षेत्र की सड़कों पर घिसे टायरों के सहारे दौड़ रही 108 एंबुलेंस सेवा को तो स्वास्थ्य विभाग ने बदल कर संजीवनी प्रदान कर दी। लेकिन पीएचसी त्यूनी स्थित खुशियों की सवारी (108 एंबुलेंस) विभागीय लापरवाही के कारण बीते एक माह से अस्पताल परिसर में खड़ी हुई है। इस खुशियों की सवारी के टायर पूरी तरह से घिस चुके हैं। थोड़ी दूर चलने पर ही टायर पंचर हो जाते हैं। लिहाजा कर्मचारियों ने इसे अस्पताल परिसर में खड़ा कर दिया है। अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के बाद परिजनों को निजी वाहनों के सहारे जच्चा और बच्चा को घर तक ले जाना पड़ रहा है। सवारी के बंद होने से लोगों में खासा रोष है।
स्थानीय निवासी रामलाल सेमवाल, प्रदीप कुमार, सरोजा देवी का कहना है कि सरकार की ओर से शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा का लाभ महिलाओं को नहीं मिल रहा है। योजना का लक्ष्य प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा को सुरक्षित घर तक पहुंचाना था, लेकिन कई बार सवारी के बंद होने और बेहतर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था न होने के कारण दूरस्थ क्षेत्र की महिलाओं को पैदल ही बच्चे को लेकर गांव तक जाना पड़ रहा है जबकि, प्रसव के बाद जच्चा को खासा कमजोरी महसूस होती है।
108 एंबुलेंस सेवा के स्टेट हैड मनीष टीकू ने कहा जल्द ही टायर बदल कर क्षेत्र में खुशियों की सवारी को सुचारु कराया जाएगा।
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जनजातीय क्षेत्र की सड़कों पर घिसे टायरों के सहारे दौड़ रही 108 एंबुलेंस सेवा को तो स्वास्थ्य विभाग ने बदल कर संजीवनी प्रदान कर दी। लेकिन पीएचसी त्यूनी स्थित खुशियों की सवारी (108 एंबुलेंस) विभागीय लापरवाही के कारण बीते एक माह से अस्पताल परिसर में खड़ी हुई है। इस खुशियों की सवारी के टायर पूरी तरह से घिस चुके हैं। थोड़ी दूर चलने पर ही टायर पंचर हो जाते हैं। लिहाजा कर्मचारियों ने इसे अस्पताल परिसर में खड़ा कर दिया है। अस्पताल में सुरक्षित प्रसव के बाद परिजनों को निजी वाहनों के सहारे जच्चा और बच्चा को घर तक ले जाना पड़ रहा है। सवारी के बंद होने से लोगों में खासा रोष है।
स्थानीय निवासी रामलाल सेमवाल, प्रदीप कुमार, सरोजा देवी का कहना है कि सरकार की ओर से शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा का लाभ महिलाओं को नहीं मिल रहा है। योजना का लक्ष्य प्रसव के बाद जच्चा और बच्चा को सुरक्षित घर तक पहुंचाना था, लेकिन कई बार सवारी के बंद होने और बेहतर ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था न होने के कारण दूरस्थ क्षेत्र की महिलाओं को पैदल ही बच्चे को लेकर गांव तक जाना पड़ रहा है जबकि, प्रसव के बाद जच्चा को खासा कमजोरी महसूस होती है।
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108 एंबुलेंस सेवा के स्टेट हैड मनीष टीकू ने कहा जल्द ही टायर बदल कर क्षेत्र में खुशियों की सवारी को सुचारु कराया जाएगा।