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15 हजार श्रद्धालुओं ने किए नीलकंठ धाम के दर्शन
Updated Sat, 28 Jul 2018 02:36 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
श्रावण मास की प्राचीन नीलकंठ धाम की कांवड़ के पहले दिन बम बम भोले, हर हर महादेव के जयघोष के बीच करीब 15 हजार से अधिक शिवभक्तों ने प्राचीन शिवालय के दर्शन किए और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। पहले दिन चंद्रग्रहण के चलते यात्रा में श्रद्धालुओं की आमद अन्य वर्षों के मुकाबले कम रही। शनिवार से कांवड़ियों की आमद में इजाफा होने की उम्मीद है। शिवभक्तों ने तीर्थनगरी में गंगा स्नान किया और पैदल मार्ग व यातायात मार्ग से प्राचीन शिवधाम की यात्रा के लिए प्रस्थान किया। नीलकंठ मंदिर समिति के अनुसार शुक्रवार को पहले दिन करीब 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर के दर्शन किए और जलार्पण कर पुण्य कमाया।
दूसरी ओर यात्रा शुरू होने पर भी तीर्थनगरी से लेकर नीलकंठ धाम तक सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हो पाया लिहाजा शिवभक्तों को गड्ढों वाले दोनों हाईवे पर हिचकोले खाकर जैसे तैसे यात्रा करनी पड़ी। वहीं सोलर लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय शिवभक्तों को घुप अंधेरे में यात्रा करनी पड़ी। यात्रा शुरू होने पर भी नीलकंठ मंदिर क्षेत्र में बजट की मंजूरी के बावजूद तीन किमी. लंबी पेयजल लाइन का कार्य तक शुरू नहीं हो पाया, जिसके चलते यात्राकाल में कांवड़ियों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए जल संस्थान कोटद्वार डिवीजन वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने और श्रावण मास बीतने के बाद लाइन बिछाने का दावा कर रहा है।
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श्रावण मास की प्राचीन नीलकंठ धाम की कांवड़ के पहले दिन बम बम भोले, हर हर महादेव के जयघोष के बीच करीब 15 हजार से अधिक शिवभक्तों ने प्राचीन शिवालय के दर्शन किए और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया। पहले दिन चंद्रग्रहण के चलते यात्रा में श्रद्धालुओं की आमद अन्य वर्षों के मुकाबले कम रही। शनिवार से कांवड़ियों की आमद में इजाफा होने की उम्मीद है। शिवभक्तों ने तीर्थनगरी में गंगा स्नान किया और पैदल मार्ग व यातायात मार्ग से प्राचीन शिवधाम की यात्रा के लिए प्रस्थान किया। नीलकंठ मंदिर समिति के अनुसार शुक्रवार को पहले दिन करीब 15 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने मंदिर के दर्शन किए और जलार्पण कर पुण्य कमाया।
दूसरी ओर यात्रा शुरू होने पर भी तीर्थनगरी से लेकर नीलकंठ धाम तक सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हो पाया लिहाजा शिवभक्तों को गड्ढों वाले दोनों हाईवे पर हिचकोले खाकर जैसे तैसे यात्रा करनी पड़ी। वहीं सोलर लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय शिवभक्तों को घुप अंधेरे में यात्रा करनी पड़ी। यात्रा शुरू होने पर भी नीलकंठ मंदिर क्षेत्र में बजट की मंजूरी के बावजूद तीन किमी. लंबी पेयजल लाइन का कार्य तक शुरू नहीं हो पाया, जिसके चलते यात्राकाल में कांवड़ियों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इसके लिए जल संस्थान कोटद्वार डिवीजन वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने और श्रावण मास बीतने के बाद लाइन बिछाने का दावा कर रहा है।
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