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बूढ़ी टरबाइनों ने दिया जवाब, विद्युत उत्पादन ठप
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
राज्य सरकार की लापरवाही से चीला पावर हाउस में विद्युत उत्पादन ठप हो गया है। कारण, 35 साल उम्र की टरबाइनों से उत्तराखंड जल विद्युत निगम 40 साल बाद भी जैसे-तैसे काम ले रहा है, जिसके चलते बीते शुक्रवार को पावर हाउस में लगी चारों टरबाइनें जवाब दे गई। विभागीय अफसर और विशेषज्ञों की टीम अब टरबाइनों को चालू करने के लिए उनकी रिपेयरिंग करने में जुटी हुई है।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम के शक्ति नहर पर स्थापित 144 मेगावॉट के चीला पावर हाउस में बिजली उत्पादन बीते शुक्रवार को अपराह्न 2.50 बजे से टरबाइनों में अचानक तकनीकी खराबी से बंद हो गया, जिससे पिटकुल के ग्रिड को प्रतिदिन मिलने वाली करीब 3 मिलियन यूनिट बिजली भी बंद हो गई है। टरबाइनों में खराबी की जानकारी लगते ही निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। शनिवार को निगम के अफसरों और एक्सपर्ट की टीम पावर हाउस पहुंची। उन्होंने टरबाइनों की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। बावजूद इसके शनिवार रात तक टरबाइनें नहीं घूम सकी।
निगम अधिकारियों के मुताबिक पावर हाउस में स्थापित टरबाइनों की उम्र लगभग 35 वर्ष है, लेकिन उनसे बिजली उत्पादन करते हुए करीब 40 साल हो चुके हैं। ऐसे में टरबाइनों में तकनीकी खामियों का सामने आना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी टरबाइन कई बार खराब हो चुकी हैं। बताया कि अभी यह कह पाना संभव नहीं है कि टरबाइनें सुचारु रूप से कब तक काम करना शुरू करेंगी।
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मुख्यालय को पहले ही भेजा गया था पत्र
अधिकारियों के मुताबिक टरबाइनों की हालत को लेकर मुख्यालय को पत्र के माध्यम से कई बार अवगत कराया जा चुका है। फिलहाल टरबाइनों को चालू करने पर फोकस है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
पैदा हो सकता है बिजली संकट
चीला पावर हाउस से पैदा होने वाली बिजली को निगम पिटकुल के ग्रिड को सप्लाई करता है, जो कि ग्रिड से प्रदेश के विभिन्न इलाकों में लोगों के घरों आदि तक पहुंचती है। विद्युत उत्पादन ठप होने से राज्य में बिजली संकट के पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है।
कोट्स
चीला पावर हाउस के खराब टरबाइनों को ठीक करने का काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि दो दिनों के अंदर पावर हाउस चालू हो जाएगा।
- पुरषोत्तम सिंह, निदेशक, उत्तराखंड जल विद्युत निगम, देहरादून।
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राज्य सरकार की लापरवाही से चीला पावर हाउस में विद्युत उत्पादन ठप हो गया है। कारण, 35 साल उम्र की टरबाइनों से उत्तराखंड जल विद्युत निगम 40 साल बाद भी जैसे-तैसे काम ले रहा है, जिसके चलते बीते शुक्रवार को पावर हाउस में लगी चारों टरबाइनें जवाब दे गई। विभागीय अफसर और विशेषज्ञों की टीम अब टरबाइनों को चालू करने के लिए उनकी रिपेयरिंग करने में जुटी हुई है।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम के शक्ति नहर पर स्थापित 144 मेगावॉट के चीला पावर हाउस में बिजली उत्पादन बीते शुक्रवार को अपराह्न 2.50 बजे से टरबाइनों में अचानक तकनीकी खराबी से बंद हो गया, जिससे पिटकुल के ग्रिड को प्रतिदिन मिलने वाली करीब 3 मिलियन यूनिट बिजली भी बंद हो गई है। टरबाइनों में खराबी की जानकारी लगते ही निगम के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। शनिवार को निगम के अफसरों और एक्सपर्ट की टीम पावर हाउस पहुंची। उन्होंने टरबाइनों की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है। बावजूद इसके शनिवार रात तक टरबाइनें नहीं घूम सकी।
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निगम अधिकारियों के मुताबिक पावर हाउस में स्थापित टरबाइनों की उम्र लगभग 35 वर्ष है, लेकिन उनसे बिजली उत्पादन करते हुए करीब 40 साल हो चुके हैं। ऐसे में टरबाइनों में तकनीकी खामियों का सामने आना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी टरबाइन कई बार खराब हो चुकी हैं। बताया कि अभी यह कह पाना संभव नहीं है कि टरबाइनें सुचारु रूप से कब तक काम करना शुरू करेंगी।
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मुख्यालय को पहले ही भेजा गया था पत्र
अधिकारियों के मुताबिक टरबाइनों की हालत को लेकर मुख्यालय को पत्र के माध्यम से कई बार अवगत कराया जा चुका है। फिलहाल टरबाइनों को चालू करने पर फोकस है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
पैदा हो सकता है बिजली संकट
चीला पावर हाउस से पैदा होने वाली बिजली को निगम पिटकुल के ग्रिड को सप्लाई करता है, जो कि ग्रिड से प्रदेश के विभिन्न इलाकों में लोगों के घरों आदि तक पहुंचती है। विद्युत उत्पादन ठप होने से राज्य में बिजली संकट के पैदा होने की आशंका भी जताई जा रही है।
कोट्स
चीला पावर हाउस के खराब टरबाइनों को ठीक करने का काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि दो दिनों के अंदर पावर हाउस चालू हो जाएगा।
- पुरषोत्तम सिंह, निदेशक, उत्तराखंड जल विद्युत निगम, देहरादून।