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बैंक और नर्सिंग होम बन रहे जाम के कारण
Updated Tue, 26 Jun 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
तीर्थनगरी के विभिन्न बैंक संस्थान और नर्सिंग होम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं। इन संस्थानों के पास निजी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण संस्थानों में आने वाले लोग अपने वाहनों को अक्सर मुख्य मार्गों के किनारे पार्क कर देते हैं, जिससे जाम लग जाता है। नगर क्षेत्र के रेलवे रोड, लक्ष्मणझूला रोड, हरिद्वार रोड और देहरादून रोड पर विभिन्न बैंक प्रतिष्ठान व नर्सिंग होम स्थापित हैं। इनमें से अधिकांश के पास अपनी पार्किंग व्यवस्था नहीं है।
संस्थानों में काम के लिए आने वाले लोगों के वाहन उक्त मार्गों के किनारे पार्क किए जाते हैं। जगह-जगह मुख्य मार्गों के किनारे वाहनों के जमावडे़ से अक्सर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। नगर क्षेत्र में जाम से कई दफा स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक मार्ग पर लगने वाले जाम से दूसरे मार्ग का यातायात भी प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण पैदल राहगीरों को भी निकलने तक का रास्ता नहीं मिल पाता है।
शासन में धूल फांक रही निकाय की फाइल
बैंकों से उत्पन्न होने वाली ट्रैफिक की समस्या के स्थायी निराकरण के लिए नगर निगम के स्तर से पहल की गई, मगर इस योजना से जुड़ी फाइल लंबे समय से शासन में धूल फांक रही हैं। पूर्व में एनडी तिवारी सरकार के समय तत्कालीन नगर निकाय की ओर से कांपलेक्स योजना तैयार की गई थी, जिसमें सभी बैंकों व जन सुविधाओं से जुड़े विभागों को एक छत के नीचे परिसर उपलब्ध कराया जाना था। करीब 13 करोड़ रुपये का योजना से जुड़ा इस्टीमेंट अब तक शासन में लंबित है।
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कोट्स
बैंक और नर्सिंग होम के बाहर खड़े वाहनों से अक्सर जाम लग जाता है। इसके लिए बैंकों और नर्सिंग होम को अपनी पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। यह बैंकों की सुरक्षा के लिहाज से भी आवश्यक है।
प्रवीण सिंह कोश्यारी, कोतवाली प्रभारी।
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तीर्थनगरी के विभिन्न बैंक संस्थान और नर्सिंग होम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं। इन संस्थानों के पास निजी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण संस्थानों में आने वाले लोग अपने वाहनों को अक्सर मुख्य मार्गों के किनारे पार्क कर देते हैं, जिससे जाम लग जाता है। नगर क्षेत्र के रेलवे रोड, लक्ष्मणझूला रोड, हरिद्वार रोड और देहरादून रोड पर विभिन्न बैंक प्रतिष्ठान व नर्सिंग होम स्थापित हैं। इनमें से अधिकांश के पास अपनी पार्किंग व्यवस्था नहीं है।
संस्थानों में काम के लिए आने वाले लोगों के वाहन उक्त मार्गों के किनारे पार्क किए जाते हैं। जगह-जगह मुख्य मार्गों के किनारे वाहनों के जमावडे़ से अक्सर जाम की स्थिति पैदा हो जाती है। नगर क्षेत्र में जाम से कई दफा स्थिति ऐसी हो जाती है कि एक मार्ग पर लगने वाले जाम से दूसरे मार्ग का यातायात भी प्रभावित हो जाता है, जिसके कारण पैदल राहगीरों को भी निकलने तक का रास्ता नहीं मिल पाता है।
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शासन में धूल फांक रही निकाय की फाइल
बैंकों से उत्पन्न होने वाली ट्रैफिक की समस्या के स्थायी निराकरण के लिए नगर निगम के स्तर से पहल की गई, मगर इस योजना से जुड़ी फाइल लंबे समय से शासन में धूल फांक रही हैं। पूर्व में एनडी तिवारी सरकार के समय तत्कालीन नगर निकाय की ओर से कांपलेक्स योजना तैयार की गई थी, जिसमें सभी बैंकों व जन सुविधाओं से जुड़े विभागों को एक छत के नीचे परिसर उपलब्ध कराया जाना था। करीब 13 करोड़ रुपये का योजना से जुड़ा इस्टीमेंट अब तक शासन में लंबित है।
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बैंक और नर्सिंग होम के बाहर खड़े वाहनों से अक्सर जाम लग जाता है। इसके लिए बैंकों और नर्सिंग होम को अपनी पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाएगा। यह बैंकों की सुरक्षा के लिहाज से भी आवश्यक है।
प्रवीण सिंह कोश्यारी, कोतवाली प्रभारी।