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कोर्ट से अवमानना नोटिस मिलने पर बैक फुट पर आया गढ़वाल विवि
Updated Wed, 20 Jun 2018 10:27 PM IST
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श्रीनगर। हाईकोर्ट से अवमानना नोटिस मिलने पर गढ़वाल विवि बैकफुट पर आ गया है। विवि प्रशासन ने वर्ष 2009 के बाद विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई सीटें व स्वीकृत पाठ्यक्रम निरस्त किए जाने के आदेश को वापस ले लिया है।
20 मार्च 2018 को गढ़वाल विवि की विद्या परिषद (एकेडमिक काउंसिल) में वर्ष 2009 के बाद विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई सीटें व स्वीकृत पाठ्यक्रम निरस्त किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिस पर कुछ निजी संस्थान हाईकोर्ट से स्टे आदेश ले आए थे। बावजूद इसके कुलसचिव ने 7 जून को फिर सीटों के निरस्तीकरण का आदेश जारी किया था। विवि प्रशासन के निर्णय ले 70 संस्थानों की सात हजार सीटें प्रभावित हो रही है। इस पर हाईकोर्ट ने कुलसचिव को अवमानना को नोटिस जारी किया था। कोर्ट से नोटिस जारी होने पर मंगलवार देर शाम कुलसचिव डा. एके झा ने सीटों का निरस्तीकरण वापस लिए जाने का आदेश जारी किया, जिसे बुधवार को विवि की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है।
एमएचआरडी के निर्देश को नहीं लिया गंभीरता से
श्रीनगर। गढ़वाल विवि प्रशासन यदि एमएचआरडी के निर्देश को गंभीरता से लेता तो यह नौबत नहीं आती। एमएचआरडी ने 1 मार्च 2018 को गढ़वाल विवि को पत्र भेज 2009 के स्टेटस के आधार पर ही सीटों में प्रवेश दिए जाने का निर्देश दिया था, लेकिन विवि प्रशासन ने कहीं भी इस पत्र का जिक्र नहीं किया। अगर 12 मई को कार्यपरिषद की बैठक में विवि प्रशासन इस पत्र का हवाला देता तो कार्य परिषद भी सीटों के निरस्तीकरण का समर्थन करती। वहीं हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश के दौरान विवि को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का समय दिया था, लेकिन विवि प्रशासन ने स्थगन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा। विवि के अधिकारी मान रहे हैं, कि यदि स्थगन आदेश के खिलाफ कोर्ट में एमएचआरडी का पत्र रखा जाता तो स्थितियां यह नहीं होती।
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20 मार्च 2018 को गढ़वाल विवि की विद्या परिषद (एकेडमिक काउंसिल) में वर्ष 2009 के बाद विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई सीटें व स्वीकृत पाठ्यक्रम निरस्त किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिस पर कुछ निजी संस्थान हाईकोर्ट से स्टे आदेश ले आए थे। बावजूद इसके कुलसचिव ने 7 जून को फिर सीटों के निरस्तीकरण का आदेश जारी किया था। विवि प्रशासन के निर्णय ले 70 संस्थानों की सात हजार सीटें प्रभावित हो रही है। इस पर हाईकोर्ट ने कुलसचिव को अवमानना को नोटिस जारी किया था। कोर्ट से नोटिस जारी होने पर मंगलवार देर शाम कुलसचिव डा. एके झा ने सीटों का निरस्तीकरण वापस लिए जाने का आदेश जारी किया, जिसे बुधवार को विवि की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है।
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एमएचआरडी के निर्देश को नहीं लिया गंभीरता से
श्रीनगर। गढ़वाल विवि प्रशासन यदि एमएचआरडी के निर्देश को गंभीरता से लेता तो यह नौबत नहीं आती। एमएचआरडी ने 1 मार्च 2018 को गढ़वाल विवि को पत्र भेज 2009 के स्टेटस के आधार पर ही सीटों में प्रवेश दिए जाने का निर्देश दिया था, लेकिन विवि प्रशासन ने कहीं भी इस पत्र का जिक्र नहीं किया। अगर 12 मई को कार्यपरिषद की बैठक में विवि प्रशासन इस पत्र का हवाला देता तो कार्य परिषद भी सीटों के निरस्तीकरण का समर्थन करती। वहीं हाईकोर्ट ने स्थगन आदेश के दौरान विवि को दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने का समय दिया था, लेकिन विवि प्रशासन ने स्थगन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा। विवि के अधिकारी मान रहे हैं, कि यदि स्थगन आदेश के खिलाफ कोर्ट में एमएचआरडी का पत्र रखा जाता तो स्थितियां यह नहीं होती।
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