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परिवार का ही नहीं पूरी यूनिट का दुलारा था विकास
Updated Sun, 17 Jun 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर।
जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ गुमानीवाला का लाल विकास गुरुंग परिवार में ही नहीं पूरी यूनिट का दुलारा था। पिता रमेश गुरुंग ने बताया कि विकास पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी आगे रहता था। इसीलिए उसे पूरी यूनिट बहुत प्यार करती थी। विकास 29 मार्च को ही 36 दिन की छुट्टी पर घर आया था। तब घर में हंसी खुशी का माहौल था। 6 अप्रैल को विकास का जन्मदिन मनाया गया था। इस दौरान विकास ने अपने दोस्तों को भी बुलाया था।
पिता ने बताया कि 14 जून को विकास ने घर पर फोन किया था। उसने सब ठीक होने की बात कही थी, लेकिन शनिवार को सुबह सैन्य अधिकारियों के फोन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से पूरा परिवार सदमे में है। विकास की शहादत की सूचना मिलने के बाद उपजिलाधिकारी हर गिरि, गुमानीवाला के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश व्यास सहित काफी संख्या में आसपास के लोग उनके घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया।
फौजी पिता के दोनों बेटे भी सेना में
श्यामपुर। शहीद के पिता रमेश गुरुंग सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनके दोनों बेटों ने भी सेना में जाकर देशसेवा करने का निर्णय लिया। पढ़ाई करने के बाद पहले उनका बड़ा बेटा निरंजन गुरुंग गोरखा राइफल्स में भर्ती हुआ। उसके बाद विकास ने आर्मी ज्वाइन की।
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विधानसभा अध्यक्ष ने व्यक्त की सांत्वना
क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद विकास गुरुंग के घर पहुंचकर सांत्वना व्यक्त करते हुए शहीद के परिजनों को ढांढस बंधाया। शहीद के परिजनों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का एक और लाल देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया है। उत्तराखंड वीरों की भूमि है। शहीद विकास गुरुंग की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
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जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हुआ गुमानीवाला का लाल विकास गुरुंग परिवार में ही नहीं पूरी यूनिट का दुलारा था। पिता रमेश गुरुंग ने बताया कि विकास पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी आगे रहता था। इसीलिए उसे पूरी यूनिट बहुत प्यार करती थी। विकास 29 मार्च को ही 36 दिन की छुट्टी पर घर आया था। तब घर में हंसी खुशी का माहौल था। 6 अप्रैल को विकास का जन्मदिन मनाया गया था। इस दौरान विकास ने अपने दोस्तों को भी बुलाया था।
पिता ने बताया कि 14 जून को विकास ने घर पर फोन किया था। उसने सब ठीक होने की बात कही थी, लेकिन शनिवार को सुबह सैन्य अधिकारियों के फोन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटे के शहीद होने की खबर मिलने के बाद से पूरा परिवार सदमे में है। विकास की शहादत की सूचना मिलने के बाद उपजिलाधिकारी हर गिरि, गुमानीवाला के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश व्यास सहित काफी संख्या में आसपास के लोग उनके घर पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया।
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फौजी पिता के दोनों बेटे भी सेना में
श्यामपुर। शहीद के पिता रमेश गुरुंग सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनके दोनों बेटों ने भी सेना में जाकर देशसेवा करने का निर्णय लिया। पढ़ाई करने के बाद पहले उनका बड़ा बेटा निरंजन गुरुंग गोरखा राइफल्स में भर्ती हुआ। उसके बाद विकास ने आर्मी ज्वाइन की।
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विधानसभा अध्यक्ष ने व्यक्त की सांत्वना
क्षेत्रीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने शहीद विकास गुरुंग के घर पहुंचकर सांत्वना व्यक्त करते हुए शहीद के परिजनों को ढांढस बंधाया। शहीद के परिजनों को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का एक और लाल देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया है। उत्तराखंड वीरों की भूमि है। शहीद विकास गुरुंग की कुर्बानी को कभी भुलाया नहीं जा सकता।