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सांस्कृतिक विरासत को भूलना उतराखंड के लिये शुभ संकेत नहीं
Updated Sat, 16 Jun 2018 11:00 PM IST
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जोशीमठ। श्री अरविंद सोसायटी की ओर से ‘हिमालय की संस्कृति में संस्कृति का हिमालय’ विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर चर्चा की गई।
ब्लॉक सभागार में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता वरिष्ठ रंगकर्मी डा. डीआर पुरोहित ने कहा कि हिमालय की सांस्कृतिक विरासत पर संकट आ गया है। पहाड़ी समाज अपनी रिति-रिवाज, बोली-भाषा, संस्कृति व सदाचार से विमुख होता जा रहा है, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विरासत को बचाने के लिए सतत प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रोजेक्ट के माध्यम से उत्तराखंड के तीज-त्योहारों और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं अमेरिका के ओहोवा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रेडरिक स्मिथ ने कहा कि उत्तराखंड की लोक विरासत विराटता लिए हैं। इस संस्कृति के संरक्षण के लिए वैदिक परंपराओं का निर्वहन करना जरूरी है। इस अवसर पर डा. चरण सिंह राणा, ऋषि प्रसाद सती, भगवती प्रसाद कपरवाण, रमेश चंद्र सती, प्रकाश पंवार, मंजीत सिंह, अनील पंवार और डीपी देवली आदि मौजूद थे।
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ब्लॉक सभागार में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता वरिष्ठ रंगकर्मी डा. डीआर पुरोहित ने कहा कि हिमालय की सांस्कृतिक विरासत पर संकट आ गया है। पहाड़ी समाज अपनी रिति-रिवाज, बोली-भाषा, संस्कृति व सदाचार से विमुख होता जा रहा है, जो उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की विरासत को बचाने के लिए सतत प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने पावर प्वाइंट प्रोजेक्ट के माध्यम से उत्तराखंड के तीज-त्योहारों और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी। वहीं अमेरिका के ओहोवा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर फ्रेडरिक स्मिथ ने कहा कि उत्तराखंड की लोक विरासत विराटता लिए हैं। इस संस्कृति के संरक्षण के लिए वैदिक परंपराओं का निर्वहन करना जरूरी है। इस अवसर पर डा. चरण सिंह राणा, ऋषि प्रसाद सती, भगवती प्रसाद कपरवाण, रमेश चंद्र सती, प्रकाश पंवार, मंजीत सिंह, अनील पंवार और डीपी देवली आदि मौजूद थे।
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