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जल समाधि पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाएंगे
Updated Sat, 09 Jun 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि और निरंजनी अखाड़ा व आनंद अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद महाराज ने शुक्रवार को हुई भेंट वार्ता में आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की। इस दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने उनसे आगामी इलाहाबाद कुंभ को स्वच्छ व हरित कुंभ बनाने पर विमर्श किया।
उन्होंने कुंभ के दौरान संत सम्मेलनों के आयोजन पर भी जोर दिया। कहा कि संत सम्मेलनों में संतों को दी जाने वाली जल समाधि पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही कई बार अधजले शवों को गंगा में प्रवाहित किया जाता है, जिस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए। गंगा में प्रवाहित किए गए और अधजले शवों से जलीय जीवन प्रभावित होता है। बताया कि शव जहां पर जाकर रुकते हैं, उसके आसपास का वातावरण दुर्गंधयुक्त व प्रदूषित हो जाता है। उन्होंने कहा कि जागरुकता के अभाव में लोग मृत जानवरों को भी जल में प्रवाहित करते हैं, जिससे जल प्रदूषित बढ़ता है। इस दौरान उन्होंने कुंभ के दौरान प्लास्टिक के थैले, कप-प्लेट, बैग व प्लास्टिक को पूर्णरूप से प्रतिबंधित करने पर जोर दिया।
स्वामी बालकानंद महाराज ने कहा कि प्रयाग कुंभ में स्वच्छता और पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा करना आवश्यक है। कहा कि कुंभ के दौरान होने वाले संत सम्मेलन में स्वच्छता और संतों को जल समाधि के विषय को प्रमुखता से रखने व प्रभावी कदम उठाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इन्हीं बिंदुओं को लेकर जल्द संतों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें हरिद्वार और ऋषिकेश के आश्रमों और मठों के संत, महंत शिरकत करेंगे।
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ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि और निरंजनी अखाड़ा व आनंद अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद महाराज ने शुक्रवार को हुई भेंट वार्ता में आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा की। इस दौरान स्वामी चिदानंद मुनि ने उनसे आगामी इलाहाबाद कुंभ को स्वच्छ व हरित कुंभ बनाने पर विमर्श किया।
उन्होंने कुंभ के दौरान संत सम्मेलनों के आयोजन पर भी जोर दिया। कहा कि संत सम्मेलनों में संतों को दी जाने वाली जल समाधि पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही कई बार अधजले शवों को गंगा में प्रवाहित किया जाता है, जिस पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगना चाहिए। गंगा में प्रवाहित किए गए और अधजले शवों से जलीय जीवन प्रभावित होता है। बताया कि शव जहां पर जाकर रुकते हैं, उसके आसपास का वातावरण दुर्गंधयुक्त व प्रदूषित हो जाता है। उन्होंने कहा कि जागरुकता के अभाव में लोग मृत जानवरों को भी जल में प्रवाहित करते हैं, जिससे जल प्रदूषित बढ़ता है। इस दौरान उन्होंने कुंभ के दौरान प्लास्टिक के थैले, कप-प्लेट, बैग व प्लास्टिक को पूर्णरूप से प्रतिबंधित करने पर जोर दिया।
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स्वामी बालकानंद महाराज ने कहा कि प्रयाग कुंभ में स्वच्छता और पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा करना आवश्यक है। कहा कि कुंभ के दौरान होने वाले संत सम्मेलन में स्वच्छता और संतों को जल समाधि के विषय को प्रमुखता से रखने व प्रभावी कदम उठाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इन्हीं बिंदुओं को लेकर जल्द संतों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें हरिद्वार और ऋषिकेश के आश्रमों और मठों के संत, महंत शिरकत करेंगे।
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