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जमीन पर गिरे फल खाने से करें परहेज
Updated Tue, 05 Jun 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश ।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से निपाह वायरस जैसी घातक बीमारी से बचने लिए लोगों को जागरूक किया गया। उन्होंने लोगों को निपाह वायरस क्या है, वह कैसे फैलता है, संबंधी जानकारी दी और रोकथाम के उपाय बताए। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने बताया कि निपाह वायरस का पहला मामला सबसे पहले सिंगापुर मलेशिया में 1999 में सामने आया था। यह वायरस सबसे पहले सुअर, चमगादड़ या अन्य जीवों को प्रभावित करता है और इनके संपर्क में आने से मनुष्यों को भी चपेट में ले लेता है। इस बीमारी में शुरुआती तौर पर दिमाग में तेज जलन, सिर दर्द और बुखार होता है।
24 से 48 घंटे में यदि ऐसे लक्षण काबू में नहीं आएं तो इंसान कोमा में चला जाता है और प्रभावी इलाज नहीं मिलने पर इंसान की मौत हो जाती है। निपाह वायरस मूलरूप से जानवरों से इंसान में फैलता है, इसके लिए जानवरों के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। निपाह वायरस के वाहक फलों का रस चूसने वाले चमकादड़ होते हैं। लिहाजा जमीन पर गिरे या कटे फलों को खाने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में चिकित्सक से संपर्क किया जाना चाहिए, जिससे इस बीमारी से बचा जा सके।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से निपाह वायरस जैसी घातक बीमारी से बचने लिए लोगों को जागरूक किया गया। उन्होंने लोगों को निपाह वायरस क्या है, वह कैसे फैलता है, संबंधी जानकारी दी और रोकथाम के उपाय बताए। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. हरिओम प्रसाद ने बताया कि निपाह वायरस का पहला मामला सबसे पहले सिंगापुर मलेशिया में 1999 में सामने आया था। यह वायरस सबसे पहले सुअर, चमगादड़ या अन्य जीवों को प्रभावित करता है और इनके संपर्क में आने से मनुष्यों को भी चपेट में ले लेता है। इस बीमारी में शुरुआती तौर पर दिमाग में तेज जलन, सिर दर्द और बुखार होता है।
24 से 48 घंटे में यदि ऐसे लक्षण काबू में नहीं आएं तो इंसान कोमा में चला जाता है और प्रभावी इलाज नहीं मिलने पर इंसान की मौत हो जाती है। निपाह वायरस मूलरूप से जानवरों से इंसान में फैलता है, इसके लिए जानवरों के सीधे संपर्क में आने से बचना चाहिए। निपाह वायरस के वाहक फलों का रस चूसने वाले चमकादड़ होते हैं। लिहाजा जमीन पर गिरे या कटे फलों को खाने से बचना चाहिए। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखने पर बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल में चिकित्सक से संपर्क किया जाना चाहिए, जिससे इस बीमारी से बचा जा सके।
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