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आपदा, राहत बचाव कार्य के लिए तत्पर रहें अधिकारी
Updated Fri, 01 Jun 2018 10:44 PM IST
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गोपेश्वर। आगामी मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर डीएम जिलाधिकारी आशीष जोशी ने जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। डीएम ने आईआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) से जुड़े अधिकारियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए।
जिला आपदा परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में डीएम आशीष जोशी ने अधिकारियों को आपदा राहत एवं बचाव कार्य के तहत किए जाने वाले कार्यों का पूर्वाभ्यास करने के निर्देश दिए। सड़क निर्माणदायी संस्थाओं को सड़कों के भूस्खलन क्षेत्रों में मशीनरी और मैन पावर की तैनाती के निर्देश दिए। जिला पूर्ति अधिकारी को आगामी तीन माह के लिए खाद्यान्न एवं ईंधन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने को कहा। डीएम ने कहा कि यात्रामार्ग पर सभी अस्पतालों में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करें। गैरसैंण व पोखरी में पेयजल की समस्या को देखते हुए डीएम ने जल संस्थान के अधिकारियों से जवाब मांगा। जगह-जगह पेयजल लाइनों की लीकेज पर डीएम ने नाराजगी जताई। कहा कि जिन क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत बनी है, वहां टैंकरों से जलापूर्ति की जाए। बैठक में बदरीनाथ वन्य जीव प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी एनएन पांडेय ने बताया कि जिले में जंगल की आग लगने की अभी तक 97 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 151.25 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
जिला आपदा परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में डीएम आशीष जोशी ने अधिकारियों को आपदा राहत एवं बचाव कार्य के तहत किए जाने वाले कार्यों का पूर्वाभ्यास करने के निर्देश दिए। सड़क निर्माणदायी संस्थाओं को सड़कों के भूस्खलन क्षेत्रों में मशीनरी और मैन पावर की तैनाती के निर्देश दिए। जिला पूर्ति अधिकारी को आगामी तीन माह के लिए खाद्यान्न एवं ईंधन और मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने को कहा। डीएम ने कहा कि यात्रामार्ग पर सभी अस्पतालों में आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करें। गैरसैंण व पोखरी में पेयजल की समस्या को देखते हुए डीएम ने जल संस्थान के अधिकारियों से जवाब मांगा। जगह-जगह पेयजल लाइनों की लीकेज पर डीएम ने नाराजगी जताई। कहा कि जिन क्षेत्रों में पेयजल की किल्लत बनी है, वहां टैंकरों से जलापूर्ति की जाए। बैठक में बदरीनाथ वन्य जीव प्रभाग के उप प्रभागीय वनाधिकारी एनएन पांडेय ने बताया कि जिले में जंगल की आग लगने की अभी तक 97 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 151.25 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
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