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सड़क न बनने से पलायन कर रहे स्वतंत्रता सेनानी के गांव के लोग

Mon, 21 May 2018 02:08 AM IST
Updated Mon, 21 May 2018 02:08 AM IST
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सड़क न बनने से पलायन कर रहे स्वतंत्रता सेनानी के गांव के लोग
ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
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केंद्र सरकार व राज्य सरकार के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के शासनादेश के बावजूद ग्राम सभा कुमार्था यातायात सुविधा से वंचित है। राज्य बनने के 18 साल बाद भी यातायात सुविधा का लाभ नहीं मिलने से ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं। इन 18 वर्षों में कुमार्था से 50 फीसदी परिवार गांव छोड़ चुके हैं। भारत स्वाधीनता आंदोलन में चार साल छह माह की कैद की सजा पर रहे स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्व. चंदन सिंह बिष्ट का गांव कुमार्था आज भी यातायात संपर्क से वंचित है, जिसके चलते ग्रामीणों को तीन किमी. खड़ी चढ़ाई व पगडंडियां नापकर मोहनचट्टी मुख्य मार्ग पर पहुंचना पड़ता है।
गांव में विवाह आदि समारोहों के आयोजन के समय ग्रामीणों को सड़क से गांव तक पीठ पर सामान ढोकर ले जाना पड़ता है, या खच्चरों में भाड़ा देकर सामान गांव तक पहुंचाना पड़ता है। सड़क सुविधा नहीं होने से गांव में बने घरों को लोग एक के बाद एक छोड़कर ऋषिकेश आदि शहरी क्षेत्रों में पलायन कर रहे हैं। वर्ष 2000 में जिस गांव में करीब 70 परिवार निवासरत थे, वहां 2018 में 30-35 परिवार रह गए हैं। स्वतंत्रता सेनानी बिष्ट के पुत्र विजय सिंह बिष्ट का कहना है कि राज्य सरकार केंद्र व राज्य सरकार के शासनादेश के बावजूद जानबूझकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के गांव को आवागमन की सुविधा से वंचित कर रही है।
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कुमार्था के ग्रामीण स्वयंबर सिंह भंडारी, प्रेम सिंह भंडारी, नरदेव पयाल, भारत सिंह पयाल ने बताया कि वर्ष 1977-78 में जीवित अवस्था में स्वतंत्रता सेनानी चंदन सिंह बिष्ट ने तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार से हेंवल नदी पर तीन पुल स्वीकृत कराए थे, जिनमें मोहनचट्टी, आमसैंण और कटघर में झूला पुल शामिल हैं। इनमें से मोहनचट्टी झूला पुल वर्ष 1980-81 में बनकर तैयार हुआ, इसके बाद उनके गांव को सड़क से जोड़ा जाना था, मगर 38 साल बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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...तो चुनाव में जीत के लिए करा दिया शिलान्यास
विजय सिंह बिष्ट का कहना है कि वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल करने के लिए वर्ष 2016 फरवरी माह में मोहनचट्टी झूला पुल के समीप कुमार्था गांव की सरहद पर शिलापट्ट लगाकर दो किलोमीटर सड़क का शिलान्यास किया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में यमकेश्वर विधानसभा से भाजपा ने लगातार चौथी बार जीत हासिल की, मगर शिलान्यास के सवा दो साल और विधायक चुने जाने के सवा साल बाद भी सड़क बनना तो दूर इसका कार्य तक शुरू नहीं हो पाया है।

कागजों में चल रहा स्वतंत्रता सेनानी के नाम का कॉलेज
वर्ष 2010 में राजकीय इंटर कॉलेज मोहनचट्टी यमकेश्वर का नाम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. चंदन सिंह बिष्ट के नाम पर रखा गया, जिसका शासनादेश जारी किया जा चुका है। बावजूद इसके उनके नाम का विद्यालय महज कागजों में संचालित हो रहा है। राजकीय इंटर कॉलेज मोहनचट्टी के नोटिस बोर्ड में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चंदन सिंह बिष्ट का कहीं कोई अता पता नहीं है। स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र ने बताया कि 2010 में शासनादेश के बावजूद 2012 तक कॉलेज की मुहर में भी उनके नाम का कहीं कोई उल्लेख नहीं था, उनकी आपत्ति के बाद कॉलेज प्रशासन ने नई मुहर बनाई।


रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हुआ स्मृति द्वार
वर्ष 2010-11 में तत्कालीन विधायक विजय बड़थ्वाल की ओर से यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र के सात स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर स्मृति द्वारों को मंजूरी दी गई थी, जिसमें मोहनचट्टी में एक द्वार फ्रीडम फाइटर स्व. चंदन सिंह बिष्ट के नाम का 5.84 लाख की लागत से स्मृति द्वार का निर्माण किया गया था। द्वार अगस्त-2014 में आपदा के दौरान ध्वस्त हो चुका है। परिवार का कहना है कि साढ़े तीन साल से स्वागत द्वार की मरम्मत की ओर कोई गौर नहीं किया जा रहा है।
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