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एक सत्र च होणु यख एक सत्र च वख...
Updated Mon, 21 May 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रा नंदन पंत की जयंती के अवसर पर अखिल भरतीय साहित्य परिषद व संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें रचनाकारों ने काव्य प्रस्तुतियां दी। दून रोड स्थित गोपाल कुटी में मुख्य अतिथि महिला नेत्री बिमला रावत, पूर्णानंद जोशी ने गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम के संयोजक धीरेंद्र सिंह रांगड़ ने प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रा नंदन पंत के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डाला। परिषद के अध्यक्ष एसपी बहुगुणा ने पंत की रचना ‘मैंने छुटपन में छिप कर पैसे बोए थे’ प्रस्तुत की। राजेंद्र बहुगुणा ने ‘अगर किसी को गाली देनी है तो नेता बोलो’ रचना के जरिए राजनीति पर तंज कसे।
प्रेम सडाना ने ‘तुम मुझे खत लिखना’ और महेश चिटकारिया ने अपनों की याद दिलाती चिट्टी रचना प्रस्तुत की। नरेंद्र रयाल ने गढ़वाली रचना ‘एक सत्र च होणु यख एक सत्र च वख’ रचना पेश कर गैरसैंण पर सरकार की नीति पर प्रहार किया। गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार धनेश कोठारी, सतेंद्र चौहान, मनोज गुप्ता, शिव प्रसाद बहुगुणा, गजेंद्र कंडियाल, भगवान सिंह, विजयपाल रांगड़, महिपाल बिष्ट, अतुल शर्मा आदि मौजूद थे।
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प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रा नंदन पंत की जयंती के अवसर पर अखिल भरतीय साहित्य परिषद व संस्कार भारती के संयुक्त तत्वावधान में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें रचनाकारों ने काव्य प्रस्तुतियां दी। दून रोड स्थित गोपाल कुटी में मुख्य अतिथि महिला नेत्री बिमला रावत, पूर्णानंद जोशी ने गोष्ठी का विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम के संयोजक धीरेंद्र सिंह रांगड़ ने प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रा नंदन पंत के साहित्यिक जीवन पर प्रकाश डाला। परिषद के अध्यक्ष एसपी बहुगुणा ने पंत की रचना ‘मैंने छुटपन में छिप कर पैसे बोए थे’ प्रस्तुत की। राजेंद्र बहुगुणा ने ‘अगर किसी को गाली देनी है तो नेता बोलो’ रचना के जरिए राजनीति पर तंज कसे।
प्रेम सडाना ने ‘तुम मुझे खत लिखना’ और महेश चिटकारिया ने अपनों की याद दिलाती चिट्टी रचना प्रस्तुत की। नरेंद्र रयाल ने गढ़वाली रचना ‘एक सत्र च होणु यख एक सत्र च वख’ रचना पेश कर गैरसैंण पर सरकार की नीति पर प्रहार किया। गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार धनेश कोठारी, सतेंद्र चौहान, मनोज गुप्ता, शिव प्रसाद बहुगुणा, गजेंद्र कंडियाल, भगवान सिंह, विजयपाल रांगड़, महिपाल बिष्ट, अतुल शर्मा आदि मौजूद थे।
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