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अंतिम सांस तक बच्चों के लिए लिखता रहूंगा : रक्सिन बांड
Updated Sun, 20 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, मसूरी
बच्चों के चहेते अंग्रेजी लेखक पद्म भूषण रस्किन बांड ने शनिवार को अपना 84 वां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया। बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उन्हें बधाई देने उनके आवास पर पहुंचे। अपने जन्मदिन पर रस्किन बांड ने अपनी नई किताब रांजी द म्यूजिक मेकर का विमोचन कर प्रशंसकों को खास तोहफा दिया।
शनिवार सुबह पारिवारिक मित्रों की मौजूदगी में रक्सिन बांड ने केट काटकर जन्मदिन मनाया। छावनी परिषद के उपाध्यक्ष महेश चंद ने फूलों का गुलदस्ता भेंटकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर रस्किन बांड ने कहा कि वह आखिरी सांस तक बच्चों के लिए लेखन का कार्य करते रहेंगे। उन्होंने नए लेखकों से अपील की कि जितना अच्छा हो लिखने का प्रयास करें, ऐसा कुछ न लिखें जिससे समाज में कोई नकारात्मक प्रभाव पड़े।
करीब तीन बजे हर शनिवार की तरह रस्किन मालरोड स्थित एक बुक डिपो पर पहुंचे, यहां सुबह से ही उनका इंतजार कर रहे प्रशंसकों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। उनकी लिखी किताबें खरीदकर रस्किन के ओटोग्राफ लिए और सेल्फी भी खिंचवाई। देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि बाधितार्थ स्कूल के विशाल गुप्ता, शिखा यादव, रतनीश कुमार पटवाल, नीलम, पूजा भट्ट, अभिषेक, मयंक आदि छात्र छात्राओं ने भी रस्किन का जन्मदिन मनाने मसूरी पहुंचे और उनके साथ फोटो खिंचवाई। रस्किन की एक प्रशंसक भास्वती हर साल की तरह रस्किन का जन्मदिन मनाने केक और उनकी पेंटिंग लेकर असम से मसूरी पहुंची। उन्होंने उनके घर पर उनसे काफी देर तक बात की। भास्वती बतातीं है कि वह बचपन से उनकी प्रशंसक हैं।
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खुद करते हैं घर का काम
रस्किन बांड की दत्तक पुत्रवधू बीना बतातीं है कि 84 वर्ष की उम्र में आज भी रस्किन घर पर अपना पूरा काम खुद करते हैं। सुबह की पहली किरण के साथ रस्किन कुछ न कुछ लेखन का काम करते है। बता दें कि रस्किन बांड का जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। मूल रूप से उनका परिवार ब्रिटेन का रहने वाला है।
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बच्चों के चहेते अंग्रेजी लेखक पद्म भूषण रस्किन बांड ने शनिवार को अपना 84 वां जन्मदिन सादगी के साथ मनाया। बड़ी संख्या में उनके प्रशंसक उन्हें बधाई देने उनके आवास पर पहुंचे। अपने जन्मदिन पर रस्किन बांड ने अपनी नई किताब रांजी द म्यूजिक मेकर का विमोचन कर प्रशंसकों को खास तोहफा दिया।
शनिवार सुबह पारिवारिक मित्रों की मौजूदगी में रक्सिन बांड ने केट काटकर जन्मदिन मनाया। छावनी परिषद के उपाध्यक्ष महेश चंद ने फूलों का गुलदस्ता भेंटकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। इस मौके पर रस्किन बांड ने कहा कि वह आखिरी सांस तक बच्चों के लिए लेखन का कार्य करते रहेंगे। उन्होंने नए लेखकों से अपील की कि जितना अच्छा हो लिखने का प्रयास करें, ऐसा कुछ न लिखें जिससे समाज में कोई नकारात्मक प्रभाव पड़े।
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करीब तीन बजे हर शनिवार की तरह रस्किन मालरोड स्थित एक बुक डिपो पर पहुंचे, यहां सुबह से ही उनका इंतजार कर रहे प्रशंसकों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। उनकी लिखी किताबें खरीदकर रस्किन के ओटोग्राफ लिए और सेल्फी भी खिंचवाई। देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि बाधितार्थ स्कूल के विशाल गुप्ता, शिखा यादव, रतनीश कुमार पटवाल, नीलम, पूजा भट्ट, अभिषेक, मयंक आदि छात्र छात्राओं ने भी रस्किन का जन्मदिन मनाने मसूरी पहुंचे और उनके साथ फोटो खिंचवाई। रस्किन की एक प्रशंसक भास्वती हर साल की तरह रस्किन का जन्मदिन मनाने केक और उनकी पेंटिंग लेकर असम से मसूरी पहुंची। उन्होंने उनके घर पर उनसे काफी देर तक बात की। भास्वती बतातीं है कि वह बचपन से उनकी प्रशंसक हैं।
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खुद करते हैं घर का काम
रस्किन बांड की दत्तक पुत्रवधू बीना बतातीं है कि 84 वर्ष की उम्र में आज भी रस्किन घर पर अपना पूरा काम खुद करते हैं। सुबह की पहली किरण के साथ रस्किन कुछ न कुछ लेखन का काम करते है। बता दें कि रस्किन बांड का जन्म 19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में हुआ था। मूल रूप से उनका परिवार ब्रिटेन का रहने वाला है।