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प्राख्यात कथा वाचक रमेश भाई ओझा पहुंचे परमार्थ निकेतन
Updated Tue, 15 May 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
सोमवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचे प्रख्यात कथावाचक रमेश भाई ओझा ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से वार्ता की। इस दौरान परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने शंख ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उनका अभिनंदन किया। सोमवार को परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचकर कथावाचक रमेश भाई ओझा ने स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से आध्यात्मिक और सामाजिक विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कथाओं के माध्यम से समाज को एकता के सूत्र में बांधने व राष्ट्रहित में कार्य के लिए युवा गतिविधियों पर जोर देने की बात कही।
स्वामी चिदानंद ने प्रयाग में अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ को लेकर चर्चा में बताया कि महाकुंभ के दौरान सभी अखाड़ों, संतों, सामाजिक संस्थाओं को समाज में व्याप्त सामाजिक और पर्यावरण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कुंभ के दौरान गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक गंगा में गिरते नाले, गंगा के तटों पर केमिकल युक्त अवशिष्ट को प्रवाहित करने, संतों को गंगा में जल समाधि देने आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा किए जाने की जरूरत बताई।
स्वामी चिदानंद मुनि ने कुंभ के दौरान अतंर धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही। कहा कि एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए संत समाज का एकजुट होना नितांत आवश्यक है। कथावाचक रमेश भाई ने कहा कि कथा के माध्यम से जन समुदाय के विचारों में विलक्षण परिवर्तन किया जा सकता है, साथ ही कथा संदेश के जरिये युवाओं के विचारों को एक सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
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सोमवार को स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचे प्रख्यात कथावाचक रमेश भाई ओझा ने आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से वार्ता की। इस दौरान परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने शंख ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच उनका अभिनंदन किया। सोमवार को परमार्थ निकेतन आश्रम पहुंचकर कथावाचक रमेश भाई ओझा ने स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि से आध्यात्मिक और सामाजिक विषयों पर चर्चा की। उन्होंने कथाओं के माध्यम से समाज को एकता के सूत्र में बांधने व राष्ट्रहित में कार्य के लिए युवा गतिविधियों पर जोर देने की बात कही।
स्वामी चिदानंद ने प्रयाग में अगले वर्ष आयोजित होने वाले कुंभ को लेकर चर्चा में बताया कि महाकुंभ के दौरान सभी अखाड़ों, संतों, सामाजिक संस्थाओं को समाज में व्याप्त सामाजिक और पर्यावरण से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कुंभ के दौरान गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक गंगा में गिरते नाले, गंगा के तटों पर केमिकल युक्त अवशिष्ट को प्रवाहित करने, संतों को गंगा में जल समाधि देने आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा किए जाने की जरूरत बताई।
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स्वामी चिदानंद मुनि ने कुंभ के दौरान अतंर धार्मिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही। कहा कि एक सशक्त समाज के निर्माण के लिए संत समाज का एकजुट होना नितांत आवश्यक है। कथावाचक रमेश भाई ने कहा कि कथा के माध्यम से जन समुदाय के विचारों में विलक्षण परिवर्तन किया जा सकता है, साथ ही कथा संदेश के जरिये युवाओं के विचारों को एक सकारात्मक दिशा दी जा सकती है।
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