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मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हरिद्वार पर 25 हजार का जुर्माना
Updated Fri, 11 May 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने देरी से और आधी-अधूरी सूचना उपलब्ध कराने पर हरिद्वार जिला मुख्यालय में तैनात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अजय कुमार गोयल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जमा न करने पर उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार को उक्त राशि को प्रशासनिक अधिकारी के देयकों से काट सामान्य प्रशासन के खाते में जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।
ईदगाह मुहल्ला सहसपुर निवासी और आरटीआई कार्यकर्ता अमर सिंह कश्यप ने 5 मार्च 2016 को तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (वर्तमान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हरिद्वार) अजय कुमार गोयल से सेंट्रल होप टाउन सेलाकुई से संबंधित चार बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने आवेदन गलत जगह स्थगित कर दिया। एक वर्ष बाद 28 नवंबर 2017 को सूचनाएं उपलब्ध हो सकी, लेकिन उपलब्ध सूचनाएं भी आधी-अधूरी थी। इस मामले में अमर सिंह कश्यप ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। जिस पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को दोषी पाया। 25 अप्रैल को जारी आदेश में राज्य सूचना आयुक्त ने तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को दोषी मानते हुए उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। उन्होंने वर्तमान लोक सूचना अधिकारी को अपीलार्थी को शेष सूचनाएं एक माह के भीतर निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने देरी से और आधी-अधूरी सूचना उपलब्ध कराने पर हरिद्वार जिला मुख्यालय में तैनात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी अजय कुमार गोयल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जमा न करने पर उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार को उक्त राशि को प्रशासनिक अधिकारी के देयकों से काट सामान्य प्रशासन के खाते में जमा करवाने के निर्देश दिए हैं।
ईदगाह मुहल्ला सहसपुर निवासी और आरटीआई कार्यकर्ता अमर सिंह कश्यप ने 5 मार्च 2016 को तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (वर्तमान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी हरिद्वार) अजय कुमार गोयल से सेंट्रल होप टाउन सेलाकुई से संबंधित चार बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। लेकिन लोक सूचना अधिकारी ने आवेदन गलत जगह स्थगित कर दिया। एक वर्ष बाद 28 नवंबर 2017 को सूचनाएं उपलब्ध हो सकी, लेकिन उपलब्ध सूचनाएं भी आधी-अधूरी थी। इस मामले में अमर सिंह कश्यप ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। जिस पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को दोषी पाया। 25 अप्रैल को जारी आदेश में राज्य सूचना आयुक्त ने तत्कालीन वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को दोषी मानते हुए उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। उन्होंने वर्तमान लोक सूचना अधिकारी को अपीलार्थी को शेष सूचनाएं एक माह के भीतर निशुल्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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