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...ऐसे पूरा होगा इको टूरिज्म का सपना
Updated Wed, 02 May 2018 02:32 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
एक तरफ वन विभाग इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जौनसार बावर की हसीन वादियों में बने ब्रिटिश कालीन विश्राम गृहों की हालत इतनी खस्ता है कि इनमें मेहमानों की मेहमान नवाजी तो दूर विभाग के कर्मचारी के लिए चौकियां भी संचालित नहीं की जा सकती।
बता दें कि जौनसार बावर में ऐसे करीब छह गेस्ट हाउस हैं, जिनका निर्माण आजादी से पूर्व ब्रिटिश काल में वर्ष 1870 में किया गया।
चीड़, बुरांश के जंगलों से घिरे और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर प्रकाष्ठ के बने ये गेस्ट हाउस दूर से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते थे, लेकिन निर्माण के 148 साल जहां इन गेस्ट हाउसों को धरोहरों की तरह सहजने की जरूरत थी। वहीं यहां गेस्ट हाउस वर्तमान में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। राजेंद्र सिंह, सतपाल सिंह, विजयपाल आदि का कहना है कि राज्य गठन के बाद से इन गेस्ट हाउस की मरम्मत के नाम पर विभाग ने एक ढोला तक खर्च नहीं किया है। आजादी से पूर्व तक यह गेस्ट हाउस अंग्रेजों की पसंद हुआ करते थे। अब माली हालत के कारण इन गेस्ट हाउसों में कोई रुकना पसंद नहीं करता। इनकी मरम्मत कराए तो पर्यटकों के यहां रुकने से विभाग की आमदनी बढ़ेगी, पर्यटन का दायरा भी बढ़ेगा।
ये हैं बदहाल विश्राम गृह
त्यूनी, कथियान, चकराता, मुंडाली, कोटी कनासर, मोल्टा स्थित वन विश्राम गृह मरम्मत के अभाव में खस्ताहाल हैं। बदहाली के कारण यहां पर्यटक नहीं रुक पाते।
विश्राम गृहों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने पर इनकी मरम्मत कराई जाएगी।
- एसके काला, एसडीओ
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एक तरफ वन विभाग इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जौनसार बावर की हसीन वादियों में बने ब्रिटिश कालीन विश्राम गृहों की हालत इतनी खस्ता है कि इनमें मेहमानों की मेहमान नवाजी तो दूर विभाग के कर्मचारी के लिए चौकियां भी संचालित नहीं की जा सकती।
बता दें कि जौनसार बावर में ऐसे करीब छह गेस्ट हाउस हैं, जिनका निर्माण आजादी से पूर्व ब्रिटिश काल में वर्ष 1870 में किया गया।
चीड़, बुरांश के जंगलों से घिरे और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर प्रकाष्ठ के बने ये गेस्ट हाउस दूर से ही पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते थे, लेकिन निर्माण के 148 साल जहां इन गेस्ट हाउसों को धरोहरों की तरह सहजने की जरूरत थी। वहीं यहां गेस्ट हाउस वर्तमान में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। राजेंद्र सिंह, सतपाल सिंह, विजयपाल आदि का कहना है कि राज्य गठन के बाद से इन गेस्ट हाउस की मरम्मत के नाम पर विभाग ने एक ढोला तक खर्च नहीं किया है। आजादी से पूर्व तक यह गेस्ट हाउस अंग्रेजों की पसंद हुआ करते थे। अब माली हालत के कारण इन गेस्ट हाउसों में कोई रुकना पसंद नहीं करता। इनकी मरम्मत कराए तो पर्यटकों के यहां रुकने से विभाग की आमदनी बढ़ेगी, पर्यटन का दायरा भी बढ़ेगा।
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ये हैं बदहाल विश्राम गृह
त्यूनी, कथियान, चकराता, मुंडाली, कोटी कनासर, मोल्टा स्थित वन विश्राम गृह मरम्मत के अभाव में खस्ताहाल हैं। बदहाली के कारण यहां पर्यटक नहीं रुक पाते।
विश्राम गृहों की मरम्मत के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होने पर इनकी मरम्मत कराई जाएगी।
- एसके काला, एसडीओ