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हनोल भूमि प्रकरण में एसडीएम और तहसीलदार को नोटिस जारी
Updated Thu, 12 Apr 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/त्यूनी।
ग्राम पंचायत चातरा के हनोल गांव में बंजर भूमि को व्यक्ति विशेष के नाम दर्ज करने के मामले में जिला प्रशासन ने फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारियों के चिन्हीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में एडीएम प्रशासन अरविंद पांडेय ने तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व उपनिरीक्षक का जवाब तलब किया है। सभी को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस जारी होने के बाद से तहसील कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। इस जांच की गाज कई कर्मियों पर गिरने की संभावना जताई जा रही हैं।
मालूम हो कि 22 जुलाई 2016 को गांव निवासी चंदराम ने तहसील कर्मियों से साठगांठ कर नियम विरुद्ध और फर्जी कागजातों के आधार पर बंजर भूमि के खसरा नंबर 115, 117, 118 और 119 की 0.2000 हेक्टेयर भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया था। मामले की शिकायत गांव निवासी संगीता देवी ने जिला प्रशासन के साथ ही गढ़वाल आयुक्त से की थी। जांच में आरोपों के सही पाए जाने पर 14 फरवरी को उक्त जमीन के विनियमितीकरण को रद्द कर दिया गया था। जांच के दौरान तहसील प्रशासन की भारी अनियमितता उजागर हुई थी। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से भी इस बात का खुलासा हुआ था कि जमीन को नाम कराने के लिए फर्जी कागजातों के साथ ही पूर्व प्रधान के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। प्रकरण में कई राजस्व कर्मियों के नाम सामने आने के बाद से जिला प्रशासन मामले को दबाने में जुट गया था। इसके बाद तीन अप्रैल को गढ़वाल आयुक्त ने जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर जांच में दोषी अधिकारियों का चिन्हीकरण कर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एडीएम अरविंद पांडेय को मामले में जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि मामले में तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर अनियमितता के संबंध में जवाब देने के लिए कहा गया है। मामले में जल्द ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई में अमल में लाई जाएगी।
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ग्राम पंचायत चातरा के हनोल गांव में बंजर भूमि को व्यक्ति विशेष के नाम दर्ज करने के मामले में जिला प्रशासन ने फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारियों के चिन्हीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में एडीएम प्रशासन अरविंद पांडेय ने तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और राजस्व उपनिरीक्षक का जवाब तलब किया है। सभी को एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं। नोटिस जारी होने के बाद से तहसील कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। इस जांच की गाज कई कर्मियों पर गिरने की संभावना जताई जा रही हैं।
मालूम हो कि 22 जुलाई 2016 को गांव निवासी चंदराम ने तहसील कर्मियों से साठगांठ कर नियम विरुद्ध और फर्जी कागजातों के आधार पर बंजर भूमि के खसरा नंबर 115, 117, 118 और 119 की 0.2000 हेक्टेयर भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया था। मामले की शिकायत गांव निवासी संगीता देवी ने जिला प्रशासन के साथ ही गढ़वाल आयुक्त से की थी। जांच में आरोपों के सही पाए जाने पर 14 फरवरी को उक्त जमीन के विनियमितीकरण को रद्द कर दिया गया था। जांच के दौरान तहसील प्रशासन की भारी अनियमितता उजागर हुई थी। आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से भी इस बात का खुलासा हुआ था कि जमीन को नाम कराने के लिए फर्जी कागजातों के साथ ही पूर्व प्रधान के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया था। प्रकरण में कई राजस्व कर्मियों के नाम सामने आने के बाद से जिला प्रशासन मामले को दबाने में जुट गया था। इसके बाद तीन अप्रैल को गढ़वाल आयुक्त ने जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर जांच में दोषी अधिकारियों का चिन्हीकरण कर उनके खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। एडीएम अरविंद पांडेय को मामले में जांच अधिकारी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि मामले में तत्कालीन अधिकारी और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर अनियमितता के संबंध में जवाब देने के लिए कहा गया है। मामले में जल्द ही दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई में अमल में लाई जाएगी।
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