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पदा प्रबंधन कार्यशाला में रखे राहत एवं बचाव कार्यों के सुझाव
Updated Sun, 25 Mar 2018 10:31 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के एसीएल हॉल में आपदा प्रबंधन के तहत बचाव एवं राहत कार्यों पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। गोष्ठी में आपदा प्रबंधन कोष के गठन व आपदा प्रबंधन की आधुनिक विधि के साथ ही पारंपरिक तौर तरीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।
रविवार को डालियों का दगड़िया संगठन और विश्व युवक केंद्र की ओर से गढ़वाल विवि के एसीएल हॉल में आपदा प्रबंधन पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डा. मोहन सिंह पंवार ने आपदा प्रबंधन पर जापान के सेंडई नगर में हुए समझौते पर जोर देने को कहा। कहा कि इस समझौते पर भारत सहित 188 देशों ने अपनी सहमति जताई थी, जिसमें आपदा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी देशों को एक जुट होने को कहा गया है। इसके अलावा सभी देशों का क्षेत्रवार जोखिम चिन्हीकरण कर मानचित्र तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई थी। कार्यशाला में विश्व युवक केंद्र के प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि युवक केंद्र आपदा प्रबंधन क्षमता विकास, पर्यावरण और गैर सरकारी संस्थाओं में प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा है। कहा कि आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील इस प्रदेश के लिए आपदा राहत कोष का गठन किया जाना जरूरी है। मुख्य प्रशिक्षक एमडीआरसी के अधिष्ठाता डा. अरविंद दरमोड़ा ने प्रदेश में आई विभिन्न आपदाओं में गढ़वाल विवि के छात्रों की ओर से बचाव एवं राहत कार्यों में योगदान की चर्चा की। पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख जनार्दन कुकशाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन के आधुनिक तौर तरीकों के साथ ही पारंपरिक तरीके भी अपनाए जाने चाहिए। इस मौके पर आशाराम ममगांई, चंद्रदेव राणा, डा. अजयपाल नेगी, डा. मनोज परमार, अनिता उनियाल व कल्पना ने भी विचार रखे।
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रविवार को डालियों का दगड़िया संगठन और विश्व युवक केंद्र की ओर से गढ़वाल विवि के एसीएल हॉल में आपदा प्रबंधन पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डा. मोहन सिंह पंवार ने आपदा प्रबंधन पर जापान के सेंडई नगर में हुए समझौते पर जोर देने को कहा। कहा कि इस समझौते पर भारत सहित 188 देशों ने अपनी सहमति जताई थी, जिसमें आपदा राहत एवं बचाव कार्यों के लिए सभी देशों को एक जुट होने को कहा गया है। इसके अलावा सभी देशों का क्षेत्रवार जोखिम चिन्हीकरण कर मानचित्र तैयार करने की आवश्यकता महसूस की गई थी। कार्यशाला में विश्व युवक केंद्र के प्रवीण कुमार शर्मा ने कहा कि युवक केंद्र आपदा प्रबंधन क्षमता विकास, पर्यावरण और गैर सरकारी संस्थाओं में प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहा है। कहा कि आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील इस प्रदेश के लिए आपदा राहत कोष का गठन किया जाना जरूरी है। मुख्य प्रशिक्षक एमडीआरसी के अधिष्ठाता डा. अरविंद दरमोड़ा ने प्रदेश में आई विभिन्न आपदाओं में गढ़वाल विवि के छात्रों की ओर से बचाव एवं राहत कार्यों में योगदान की चर्चा की। पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख जनार्दन कुकशाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन के आधुनिक तौर तरीकों के साथ ही पारंपरिक तरीके भी अपनाए जाने चाहिए। इस मौके पर आशाराम ममगांई, चंद्रदेव राणा, डा. अजयपाल नेगी, डा. मनोज परमार, अनिता उनियाल व कल्पना ने भी विचार रखे।
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