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रोज सैनिकों की लाशों से जिगर हमारे जलते हैं...
Updated Fri, 16 Mar 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/डोईवाला। स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी (एसआरएचयू) जौलीग्रांट के स्थापना दिवस समारोह के अंतिम कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से व्यवस्थाओं पर प्रहार करते हुए सामाजिक ताने-बाने और राजनीति पर तंज कसे। एसआरएचयू परिसर में बृहस्पतिवार अंतिम दिन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। देश के विभिन्न शहरों से आए नामचीन कवियों ने शानदार प्रस्तुतियों से माहौल रंगमय कर दिया। कवियों ने जहां अपनी रचनाओं से लोगों को लोटपोट किया वहीं, सामाजिक ढांचे का मजबूत बनाने का संदेश भी दिया। वीर रस के कवि विनीत चौहान ने अपनी रचना ‘बहुत हो चुका मोदी जी ये मौन तुम्हारे खलते हैं, रोज सैनिकों की लाशों से जिगर हमारे जलते हैं’ से लोगों को झकझोर दिया।
दिल्ली की डॉ. सरिता शर्मा ने ‘सारी दुनिया से दूर हो जाऊं , तेरी आंखों का नूर हो जाऊं, तेरी राधा बनूूं न बनूं तेरी मीरा जरूर हो जाऊं’ की प्रस्तुति से माहौल खुशनुमा कर दिया। अलीगढ़ से आए विष्णु सक्सेना ने ‘रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं’ की प्रस्तुति दी। जबलपुर के सुदीप भोला ने ‘कांग्रेस आई दफ्तर में बोल रहे थे रागा, जोगन हो गई पार्टी हमारी डर मोदी से लागा’ से लोगों को गुदगुदाया। जयपुर से आए हास्य कवि संपत्त सरल ने सर्वाधिक वाहवाही बटोरी। उन्होंने ‘लगाते चलो अपनी कोई दुकान दिल्ली में, पकौडे़ बेचने का हो गया ऐलान दिल्ली में’ के माध्यम से तंज कसा। हास्य रचनाओं से उन्होंने लोगों को हंसने पर विवश कर दिया। एसआरएचयू कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कवियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. विजेंद्र चौहान, डॉ. सुनील सैनी, डॉ. मुस्ताक अहमद, विनय उनियाल, डॉ. एसएल जेठाणी, डॉ. वाईएस बिष्ट और डॉ. संजय द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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दिल्ली की डॉ. सरिता शर्मा ने ‘सारी दुनिया से दूर हो जाऊं , तेरी आंखों का नूर हो जाऊं, तेरी राधा बनूूं न बनूं तेरी मीरा जरूर हो जाऊं’ की प्रस्तुति से माहौल खुशनुमा कर दिया। अलीगढ़ से आए विष्णु सक्सेना ने ‘रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा, एक आई लहर कुछ बचेगा नहीं’ की प्रस्तुति दी। जबलपुर के सुदीप भोला ने ‘कांग्रेस आई दफ्तर में बोल रहे थे रागा, जोगन हो गई पार्टी हमारी डर मोदी से लागा’ से लोगों को गुदगुदाया। जयपुर से आए हास्य कवि संपत्त सरल ने सर्वाधिक वाहवाही बटोरी। उन्होंने ‘लगाते चलो अपनी कोई दुकान दिल्ली में, पकौडे़ बेचने का हो गया ऐलान दिल्ली में’ के माध्यम से तंज कसा। हास्य रचनाओं से उन्होंने लोगों को हंसने पर विवश कर दिया। एसआरएचयू कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कवियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में डॉ. विजेंद्र चौहान, डॉ. सुनील सैनी, डॉ. मुस्ताक अहमद, विनय उनियाल, डॉ. एसएल जेठाणी, डॉ. वाईएस बिष्ट और डॉ. संजय द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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