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ध्यान के लिए प्रयत्न नहीं ध्यानमय होने की जरूरत : चिदानंद

Mon, 05 Mar 2018 01:52 AM IST
Updated Mon, 05 Mar 2018 01:52 AM IST
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ध्यान के लिए प्रयत्न नहीं ध्यानमय होने की जरूरत : चिदानंद
ब्यूरो/ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के तहत प्रात:कालीन सत्र में गंगा तट पर आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने विश्वभर से जुटे योग जिज्ञासुुुओं, साधकों विशेष ध्यान एवं जप का अभ्यास कराया। इस दौरान दक्षिण अमेरिका स्थित क्रिस्टारिया की राजदूत मेरियल क्रूज को सम्मानित किया गया।
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इंटरनेशनल योगा फेस्टिवल के चौथे दिन रविवार को परमार्थ निकेतन गंगा तट पर आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती महाराज, परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि, योग महोत्सव की निदेशक डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती, योगाचार्य आभा सरस्वती व योगाचार्य गुरुमुख कौर खालसा के सानिध्य में विशेष ध्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया।
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इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि योग विश्व के लिए वरदान है, योग को दुनिया तक प्रचार-प्रसार के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि ध्यान के लिए प्रयत्न नहीं बल्कि ध्यानमय होने की जरूरत है। बताया कि जहां पर प्रयत्न होगा वहां ध्यान नहीं हो सकता, लिहाजा ध्यान करने की नहीं स्वत: होने की अवस्था है। उन्होंने कहा कि जीवन में प्रेम, करुणा, उदारता, धैर्य और क्षमा आदि गुणों का विकसित होना ही ध्यान का प्रथम सोपान है।
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इस अवसर पर डॉ. साध्वी भगवती सरस्वती ने मोक्षदायिनी गंगा के धरती पर अवतरण की कथा सार व वर्तमान में हमारे जीवन में उसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मुक्ति केवल वही नहीं है जो हमें मरने के बाद प्राप्त होती है अर्थात मुक्ति, मृत्यु के बाद होने वाली कोई घटना नहीं है। हमारा शरीर हमें बंधन में नहीं रखता बल्कि यह हमारी जीवन पद्धति होती है जिसके माध्यम से हम शरीर और मन से परिचित होते हैं।

इस दौरान दक्षिण अमेरिका स्थित क्रिस्टारिया की राजदूत मेरियल क्रूज ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में शिरकत करना मेरे जीवन का सबसे उत्तम आध्यात्मिक उत्सव है। उन्होंने यहां के वातावरण से प्रभावित होकर योग महोत्सव में हर साल प्रतिभाग करने की इच्छा जाहिर की। इस अवसर पर प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक डॉ. ब्रूस लिप्टन, एचएस अरुण, एना फॉरेस्ट, जोज कैलार्क, मोहन भंडारी, गुरु शब्द सिंह खालसा, रुजुता दिवाकर, जुल्फ फेबर, भारत शेट्टी, अकीरा वाटामोटो, हिकारु हशिमोटो, रॉबर्टो मिल्लेटी, फ्रांसेस्का कैसिया आदि मौजूद थे।
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