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सरकारी नौकरी छोड़ खड़ा किया खुद का उेयरी उद्योग
Updated Tue, 20 Feb 2018 02:13 AM IST
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ब्यूरो/साहिया।
सुख सुविधा और अच्छी नौकरी की आस में लोग पहाड़ छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं उद्पाल्टा गांव निवासी सोराज राय ने गांव में ही बसने की चाह में सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। उन्होंने गाय, भेड़ और बकरी पालन को अपना हथियार बनाया। सोराज की मेहनत का ही नतीजा है कि उनकी मासिक आय ही एक लाख रुपये से अधिक है। वह क्षेत्र के युवाओं के लिए भी एक आदर्श बन चुके हैं।
गरीब परिवार से ताल्लुख रखने वाले 33 वर्षीय सोराज ने वर्ष 2011 में बीए की परीक्षा उर्त्तीण की। इस बीच परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी तो उन्होंने गांव में खुले मिनी बैंक में आस्थाई तौर पर नौकरी कर ली। इसी बीच सोराज ने पुलिस सिपाही भर्ती की परीक्षा दी। जिसमें वह उत्तीर्ण भी हो गए, लेकिन गांव में ही रह कर कुछ खास करने की चाह में यह नौकरी भी छोड़ दी। 2016 में अपनी जमा-पूंजी से एक गाय और भैंस खरीद कर डेयरी काम शुरू किया। सोराज के पास अब पांच गाय और दो भैंस हैं। डेयरी में बने उत्पादों की डिलवरी कई दूसरे गांव और विकासनगर बाजार तक होती है। सोराज का कहना है कि गांव में रहकर भी सफलता हासिल की जा सकती है। पशुपालन और खेती बाड़ी भी आर्थिकी सुदृढ़ करने का अच्छा साधन है। इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं भी हैं। ऐसे में युवा इन योजनाओं का लाभ लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं।
रोजाना करते हैं 45 लीटर दूध की सप्लाई
सोराज का कहना है कि शुरुआत में उन्हें खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन आज उनकी डेयरी में रोजाना 45 लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिसे वह आसपास के गांव के साथ ही बाजार में भी वितरित करते हैं।
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बकरी पालन को भी दे रहे बढ़ावा
डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के बाद भी सोराज का फोकस बकरी पालन पर भी है। सोराज का कहना है कि बकरी पालन भी आय का एक बेहतर साधन है। मंडियों में बकरे-बकरियों की खासा डिमांड रहती है। ऐसे में इस पर फोकस कर भी अच्छी आय कमाई जा सकती है।
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सुख सुविधा और अच्छी नौकरी की आस में लोग पहाड़ छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। वहीं उद्पाल्टा गांव निवासी सोराज राय ने गांव में ही बसने की चाह में सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। उन्होंने गाय, भेड़ और बकरी पालन को अपना हथियार बनाया। सोराज की मेहनत का ही नतीजा है कि उनकी मासिक आय ही एक लाख रुपये से अधिक है। वह क्षेत्र के युवाओं के लिए भी एक आदर्श बन चुके हैं।
गरीब परिवार से ताल्लुख रखने वाले 33 वर्षीय सोराज ने वर्ष 2011 में बीए की परीक्षा उर्त्तीण की। इस बीच परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी तो उन्होंने गांव में खुले मिनी बैंक में आस्थाई तौर पर नौकरी कर ली। इसी बीच सोराज ने पुलिस सिपाही भर्ती की परीक्षा दी। जिसमें वह उत्तीर्ण भी हो गए, लेकिन गांव में ही रह कर कुछ खास करने की चाह में यह नौकरी भी छोड़ दी। 2016 में अपनी जमा-पूंजी से एक गाय और भैंस खरीद कर डेयरी काम शुरू किया। सोराज के पास अब पांच गाय और दो भैंस हैं। डेयरी में बने उत्पादों की डिलवरी कई दूसरे गांव और विकासनगर बाजार तक होती है। सोराज का कहना है कि गांव में रहकर भी सफलता हासिल की जा सकती है। पशुपालन और खेती बाड़ी भी आर्थिकी सुदृढ़ करने का अच्छा साधन है। इन उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं भी हैं। ऐसे में युवा इन योजनाओं का लाभ लेकर अपना काम शुरू कर सकते हैं।
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रोजाना करते हैं 45 लीटर दूध की सप्लाई
सोराज का कहना है कि शुरुआत में उन्हें खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लेकिन आज उनकी डेयरी में रोजाना 45 लीटर दूध का उत्पादन होता है। जिसे वह आसपास के गांव के साथ ही बाजार में भी वितरित करते हैं।
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बकरी पालन को भी दे रहे बढ़ावा
डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के बाद भी सोराज का फोकस बकरी पालन पर भी है। सोराज का कहना है कि बकरी पालन भी आय का एक बेहतर साधन है। मंडियों में बकरे-बकरियों की खासा डिमांड रहती है। ऐसे में इस पर फोकस कर भी अच्छी आय कमाई जा सकती है।