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...तो अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार की जांच करा रही राज्य सरकार

Sun, 18 Feb 2018 01:53 AM IST
Updated Sun, 18 Feb 2018 01:53 AM IST
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...तो अपनी ही पूर्ववर्ती सरकार की जांच करा रही राज्य सरकार
ब्यूरो/ऋषिकेश। तीर्थनगरी के मुनिकीरेती क्षेत्र में निर्माणाधीन थ्रीलेन ब्रिज योजना के क्रियान्वयन में विलंब को लेकर राज्य सरकार अपनी ही पार्टी की पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ कमेटी गठित कर जांच करा रही है। वर्ष 2006 में मुनिकीरेती में गंगा पर सिंगल लेन झूला पुल को कांग्रेस की सरकार में मंजूरी मिली थी। इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने योजना को धरातल पर उतारने की बजाए पुलों के डिजाइनों में एक के बाद एक परिवर्तन कराए और बार-बार प्रस्ताव मांगने के बाद भी उन्हें मंजूरी नहीं दी। लिहाजा पूरे पांच साल इस्टीमेटों को मांगने और रिजेक्ट करने का खेल चलता रहा। अब त्रिवेंद्र रावत सरकार इसी प्रकरण में कमेटी गठित कर जांच करा रही है।
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वर्ष 2006 में तत्कालीन नारायण दत्त तिवारी सरकार के समय मुनिकीरेती में गंगा पर 270 मीटर स्पान के सिंगल लेन झूला पुल के लिए 4.41 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दी गई थी। इसके बाद आई भाजपा सरकार को ब्रिज योजना का क्रियान्वयन कराना था, लेकिन 2007 में बनी खंडूड़ी सरकार ने सिंगल लेन ब्रिज योजना का क्रियान्वयन नहीं कराया। वर्ष 2008 में लोक निर्माण विभाग से मुनिकीरेती में गंगा पर मोटर पुल का प्रस्ताव मांगा गया, साल में दो प्रस्ताव मांगने के बाद भी राज्य सरकार ने उक्त योजना को मंजूरी नहीं दी। इसके बाद 2010 में निशंक सरकार के समय पीडब्ल्यूडी नरेंद्रनगर डिवीजन से फिर से गंगा पर मोटर ब्रिज के साल भर में दो प्रस्ताव मांगे गए, मगर महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी नहीं दी गई।
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2012 में राज्य में बहुगुणा सरकार बनी, जिसने जनवरी-2013 में गंगा पर थ्रीलेन ब्रिज योजना को वित्तीय मंजूरी दी। बावजूद इसके समयबद्घ धनावंटन नहीं होने, ब्रिज के कार्य शुरू करने में शुरुआती सवा साल का विलंब, निर्माण एजेंसी को सरकार द्वारा भुगतान नहीं किए जाने पर कार्य रोका जाना अब तक इस योजना नहीं बन पाने की मुख्य वजहें रही हैं। अब सरकार कमेटी गठित कर योजना की तकनीकी व विलंब के कारणों की जांच करा रही है। सूत्रों की मानें तो जल्द कमेटी सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी।
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इंसेट
कई जगह भेजे प्रस्ताव मगर नहीं मिली स्वीकृति
लोक निर्माण विभाग नरेंद्रनगर डिवीजन ने सरकार से मुनिकीरेती में स्वीकृत सिंगल लेन ब्रिज योजना को खारिज कर दिए जाने और अन्य तरह के ब्रिज की डिजाइन व इस्टीमेट बनाए जाने के बाद कई जगह इसके प्रस्ताव भेजे। इनमें जाइका कंपनी जापान, 2010 महाकुंभ मेला प्रशासन, केंद्र सरकार के स्पेशल कंपोनेंट प्लान आदि में योजना को प्रस्तावित की गई थी।

शासन की लापरवाही से 15 करोड़ बढ़ गई कॉस्ट
वर्ष 2013 में गंगा पर 346 मीटर स्पान के थ्रीलेन ब्रिज को 35.45 करोड़ की वित्तीय मंजूरी दी गई थी। इसके बाद आपदा व गंगा में बाढ़ के मद्देनजर इसके डिजाइन में परिवर्तन किए जाने, शासन से एकमुश्त वित्तीय मंजूरी की बजाए किस्तों में धनावंटन किए जाने की वजह से उक्त योजना पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। इस योजना में संबंधित कांट्रेक्ट एजेंसी का सरकार पर आज भी पांच करोड़ का बकाया है। जबकि एजेंसी सवा साल पहले इसका निर्माण कार्य रोक चुकी है। दूसरी ओर विभाग की ओर से अक्तूबर-2016 में शासन को भेजा गया 51.99 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट लगभग डेढ़ साल बाद भी मंजूर नहीं हो पाया है। इससे ब्रिज की वर्तमान लागत और अधिक बढ़ने की भी पूरी संभावना बढ़ गई है।


क्या कहते हैं अफसर
महत्वकांक्षी थ्रीलेन ब्रिज योजना में समय पर धनावंटन नहीं होना और कार्य शुरू होने के बाद डिजाइन में परिवर्तन की वजह से विलंब हुआ है। यदि विभाग को ठीक समय पर धनावंटन किया जाता तो अब तक योजना को पूरा किया जा सकता था।
- रियाज अहमद, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी नरेंद्रनगर डिवीजन।
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