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औली में अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता के रद्द होने से पर्यटन व्यवसायियों और स्कीइंग खिलारड़ियों में मायूसी
Updated Fri, 09 Feb 2018 10:29 PM IST
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जोशीमठ। औली में फिस रेस का आयोजन रद्द होने से पर्यटन व्यवसायी और स्कीइंग खिलाड़ी मायूस हैं। लोगों का कहना है कि दो माह से औली में चेयर लिफ्ट खराब पड़ी है और यहां सुविधाएं भी नहीं हैं। मौसम के साथ ही शासन-प्रशासन की बेरुखी औली पर भारी पड़ रही है।
औली में 15 से 21 जनवरी तक अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता का आयोजन प्रस्तावित था, लेकिन बर्फबारी न होने से आयोजन की तिथि 16 से 22 फरवरी कर दी गई। इसके बाद भी बर्फबारी न हुई तो अब यह आयोजन रद्द ही करना पड़ा। इससे पहले भी वर्ष 2012 में औली में अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता की तैयारियां की जा रही थीं, लेकिन समय पर बर्फबारी न होने से शासन-प्रशासन की सभी तैयारियां धरी की धरी रह गई थीं। स्कीइंग खिलाड़ी प्रीति डिमरी, मनीष और आलोक का कहना है कि औली में स्कीइंग प्रतियोगिता के आयोजन के रद्द होने से मायूसी हाथ लगी है। पर्यटन व्यवसायी संतोष कुंवर, विवेक पंवार और महादीप पंवार का कहना है कि फिस रेस का आयोजन रद्द होने से शासन-प्रशासन की बेरुखी भी सामने आई है। औली में दो माह से चेयर लिफ्ट भी खराब पड़ी है। यहां स्थापित स्नो मेकिंग मशीनें भी आशा के अनुरूप कृत्रिम बर्फ नहीं बना पा रही हैं। जब ये मशीनें बर्फ बनाने लायक नहीं थीं, तो क्यों इनकी मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए गए।
औली में 15 से 21 जनवरी तक अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता का आयोजन प्रस्तावित था, लेकिन बर्फबारी न होने से आयोजन की तिथि 16 से 22 फरवरी कर दी गई। इसके बाद भी बर्फबारी न हुई तो अब यह आयोजन रद्द ही करना पड़ा। इससे पहले भी वर्ष 2012 में औली में अंतरराष्ट्रीय स्कीइंग प्रतियोगिता की तैयारियां की जा रही थीं, लेकिन समय पर बर्फबारी न होने से शासन-प्रशासन की सभी तैयारियां धरी की धरी रह गई थीं। स्कीइंग खिलाड़ी प्रीति डिमरी, मनीष और आलोक का कहना है कि औली में स्कीइंग प्रतियोगिता के आयोजन के रद्द होने से मायूसी हाथ लगी है। पर्यटन व्यवसायी संतोष कुंवर, विवेक पंवार और महादीप पंवार का कहना है कि फिस रेस का आयोजन रद्द होने से शासन-प्रशासन की बेरुखी भी सामने आई है। औली में दो माह से चेयर लिफ्ट भी खराब पड़ी है। यहां स्थापित स्नो मेकिंग मशीनें भी आशा के अनुरूप कृत्रिम बर्फ नहीं बना पा रही हैं। जब ये मशीनें बर्फ बनाने लायक नहीं थीं, तो क्यों इनकी मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए गए।
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