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माज का दपर्ण होता है साहित्य
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:45 PM IST
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देवप्रयाग। श्री रघुनाथ कीर्ति राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमीनार में सातवें दिन बृहस्पतिवार को आधुनिक विषय के ऐतिहासिक एवं साहित्यिक संदर्भ में भारतीय समाज का प्रतिविमन पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता गढ़वाल विवि के चौरास परिसर के निदेशक प्रो. दिनेश सकलानी ने कहा कि वास्तविक इतिहास का ज्ञान सुदृढ़ एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक होता है। साहित्य न केवल समाज का दर्पण होता है बल्कि इतिहास का एक प्रमुख स्रोत भी है। हमें अपना वास्तविक इतिहास का आधार भारतीय साहित्य वेदों और ग्रंथों से ही लेना चाहिए। देवसंस्कृत विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. नरेंद्रप्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी साहित्य में अंतर निहित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक तत्व विद्यमान हैं, जो मानव को अच्छे रास्ते की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करते है।
प्राचार्य केबी सुब्बारायदु ने कहा कि अपने इतिहास को पढ़कर हम अपने वर्तमान एवं भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। संगोष्ठी के संयोजक डा. अरविंद गौड़, डा. वीरेंद्र बर्तवाल, डा. आर मुरुगन, पंकज कोटियाल, डा. मुकेश डा. शैलेंद्र उनियाल आदि मौजूद थे। 10 फरवरी को क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी भी सेमिनार में प्रतिभाग करेंगे। समारोह में नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग संचालक आचार्य भास्कर जोशी व डा. भक्त वत्सल अतिथि होंगे।
गोष्ठी में मुख्य वक्ता गढ़वाल विवि के चौरास परिसर के निदेशक प्रो. दिनेश सकलानी ने कहा कि वास्तविक इतिहास का ज्ञान सुदृढ़ एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक होता है। साहित्य न केवल समाज का दर्पण होता है बल्कि इतिहास का एक प्रमुख स्रोत भी है। हमें अपना वास्तविक इतिहास का आधार भारतीय साहित्य वेदों और ग्रंथों से ही लेना चाहिए। देवसंस्कृत विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. नरेंद्रप्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी साहित्य में अंतर निहित ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक तत्व विद्यमान हैं, जो मानव को अच्छे रास्ते की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करते है।
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प्राचार्य केबी सुब्बारायदु ने कहा कि अपने इतिहास को पढ़कर हम अपने वर्तमान एवं भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। संगोष्ठी के संयोजक डा. अरविंद गौड़, डा. वीरेंद्र बर्तवाल, डा. आर मुरुगन, पंकज कोटियाल, डा. मुकेश डा. शैलेंद्र उनियाल आदि मौजूद थे। 10 फरवरी को क्षेत्रीय विधायक विनोद कंडारी भी सेमिनार में प्रतिभाग करेंगे। समारोह में नक्षत्र वेधशाला देवप्रयाग संचालक आचार्य भास्कर जोशी व डा. भक्त वत्सल अतिथि होंगे।
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