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बारूद का गोला फटा, बैल के मुंह के चीथड़े उड़े
Updated Tue, 30 Jan 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर।
केदारावाला गांव से सटे जंगल में शिकारी खुलेआम बारूद का इस्तेमाल कर रहे हैं। रविवार की शाम को बारूद के गोले से बैल के मुंह के चीथड़े उड़ गए। पीड़ित पशुपालक ने वन विभाग से मुआवजे की मांग की है।
रविवार की शाम को केदारावाला गांव निवासी सानून अपने पशुुओं को चराने के लिए जंगल में ले गया था।
इस दौरान एक बैल के मुंह में गोला फट गया। पशुपालक ने बताया कि कुछ समय पहले ही उसने 25 हजार रुपये कर्ज लेकर बैलों की जोड़ी ली थी, लेकिन गोले से एक बैल मरने की कगार पर है। पूर्व प्रधान गुलफाम अली ने बताया करीब एक साल पूर्व भी बारूद के गोले से एक गाय मर गई थी। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के जंगल में वन्य जीव तस्कर सक्रिय हैं, जो जानवरों का शिकार करने के लिए बारूद का गोला बनाकर उस पर आटा लगा देते हैं। जिसे पशु के दांतों से दबाते ही धमाका हो जाता है। वन विभाग मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। बारूद के गोले कभी ग्रामीण के पैरों के नीचे भी आ सकते हैं, तब बड़ा हादसा हो सकता है। वन विभाग शिकारियों को पकड़ नहीं रहा है। उन्होंने दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की मांग की है।
उधर कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग अंतर्गत चौहड़पुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी कुलदीप पंवार का कहना है कि जंगल में कांबिंग कराई गई है, यह पता लगाया जा रहा है कि जंगल में और गोले तो नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में बारूद का इस्तेमाल करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है।
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विकासनगर।
केदारावाला गांव से सटे जंगल में शिकारी खुलेआम बारूद का इस्तेमाल कर रहे हैं। रविवार की शाम को बारूद के गोले से बैल के मुंह के चीथड़े उड़ गए। पीड़ित पशुपालक ने वन विभाग से मुआवजे की मांग की है।
रविवार की शाम को केदारावाला गांव निवासी सानून अपने पशुुओं को चराने के लिए जंगल में ले गया था।
इस दौरान एक बैल के मुंह में गोला फट गया। पशुपालक ने बताया कि कुछ समय पहले ही उसने 25 हजार रुपये कर्ज लेकर बैलों की जोड़ी ली थी, लेकिन गोले से एक बैल मरने की कगार पर है। पूर्व प्रधान गुलफाम अली ने बताया करीब एक साल पूर्व भी बारूद के गोले से एक गाय मर गई थी। लोगों का आरोप है कि क्षेत्र के जंगल में वन्य जीव तस्कर सक्रिय हैं, जो जानवरों का शिकार करने के लिए बारूद का गोला बनाकर उस पर आटा लगा देते हैं। जिसे पशु के दांतों से दबाते ही धमाका हो जाता है। वन विभाग मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है। बारूद के गोले कभी ग्रामीण के पैरों के नीचे भी आ सकते हैं, तब बड़ा हादसा हो सकता है। वन विभाग शिकारियों को पकड़ नहीं रहा है। उन्होंने दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की मांग की है।
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उधर कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग अंतर्गत चौहड़पुर रेंज के वन क्षेत्राधिकारी कुलदीप पंवार का कहना है कि जंगल में कांबिंग कराई गई है, यह पता लगाया जा रहा है कि जंगल में और गोले तो नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में बारूद का इस्तेमाल करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है।
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