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बेस अस्पताल में खुलेगा जन औषधि केंद्र
Updated Sun, 14 Jan 2018 10:33 PM IST
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श्रीनगर। वीसीएसजी राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबंध एचएनबी बेस अस्पताल में एक माह के भीतर जन औषधि केंद्र खुल जाएगा। इस केंद्र के संचालित होने से मरीजों को कम कीमत पर दवाइयां 24 घंटे मिल सकेंगी। कॉलेज प्रबंधन ने औषधि केंद्र संचालन के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं।
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत सरकार ने बेहतर गुणवत्ता की जैनरिक दवाइयों (सामान्य) की कीमत बाजार मूल्य से कम की है। इनको सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों में बेचा जा रहा है। ताकि आम जनता को 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाईयां मिल सके। अब बेस अस्पताल श्रीनगर में भी जन औषधि केंद्र खुलने जा रहा है। मौजूदा समय में सरकारी अस्पतालों में दवाइयां काफी कम मिल रही हैं, जिसके चलते मरीजों का प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से ऊंची कीमत पर ब्रांडेड दवाइयां खरीदनी पड़ती है।
डॉक्टर लिखते हैं ब्रांडेड दवाइयां
श्रीनगर। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) के निर्देश हैं कि डॉक्टर मरीजों के पर्चे में कैपिटल लैटर में जैनरिक दवाइयां लिखेंगे , लेकिन ऐसा नहीं होता है। डॉक्टर ब्रांडेड दवाईयां ही लिखते हैं और यह निश्चित मेडिकल स्टोरों में ही उपलब्ध हो पाती हैं। ब्रांडेड दवाइयों को खरीदने में मरीजों को ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है। जन औषधि केंद्र खुलने से मेडिकल स्टोर, डॉक्टर और दवा अभिकर्ताओं की चेन टूट जाएगी।
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बेस अस्पताल की कैंटीन के समीप जन औषधि केंद्र खोला जाएगा। इसको कोई पात्र व्यक्ति/एनजीओ/बेरोजगार फार्मासिस्ट या पंजीकृत चिकित्सक खोल सकता है। प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर
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प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत सरकार ने बेहतर गुणवत्ता की जैनरिक दवाइयों (सामान्य) की कीमत बाजार मूल्य से कम की है। इनको सरकारी अस्पतालों में जन औषधि केंद्रों में बेचा जा रहा है। ताकि आम जनता को 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाईयां मिल सके। अब बेस अस्पताल श्रीनगर में भी जन औषधि केंद्र खुलने जा रहा है। मौजूदा समय में सरकारी अस्पतालों में दवाइयां काफी कम मिल रही हैं, जिसके चलते मरीजों का प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से ऊंची कीमत पर ब्रांडेड दवाइयां खरीदनी पड़ती है।
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डॉक्टर लिखते हैं ब्रांडेड दवाइयां
श्रीनगर। भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (एमसीआई) के निर्देश हैं कि डॉक्टर मरीजों के पर्चे में कैपिटल लैटर में जैनरिक दवाइयां लिखेंगे , लेकिन ऐसा नहीं होता है। डॉक्टर ब्रांडेड दवाईयां ही लिखते हैं और यह निश्चित मेडिकल स्टोरों में ही उपलब्ध हो पाती हैं। ब्रांडेड दवाइयों को खरीदने में मरीजों को ज्यादा रकम चुकानी पड़ती है। जन औषधि केंद्र खुलने से मेडिकल स्टोर, डॉक्टर और दवा अभिकर्ताओं की चेन टूट जाएगी।
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बेस अस्पताल की कैंटीन के समीप जन औषधि केंद्र खोला जाएगा। इसको कोई पात्र व्यक्ति/एनजीओ/बेरोजगार फार्मासिस्ट या पंजीकृत चिकित्सक खोल सकता है। प्रो. सीएम रावत, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज श्रीनगर