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पिरूल से बिजली बनाने को लेकर आगे आईं 21 कंपनियां
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
पिरूल से बिजली बनाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से नीति घोषित किए जाने के बाद 21 कंपनियोें ने दिलचस्पी दिखायी है। इसके अलावा एक कंपनी ने पिरूल से ईंट बनाने को लेकर भी दिलचस्पी दिखायी है। अपर सचिव ऊर्जा व निदेशक उरेडा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि विभागीय स्तर पर सारी प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा।
बता दें, राज्य सरकार ने पिरूल से बिजली बनाने के लिए नीति घोषित की है। सरकार व ऊर्जा विभाग ने पिरूल से सालाना 150 मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल उरेडा की ओर से 25-25 किलोवाट क्षमता के 20 प्लांट लगाने को लेकर निविदा जारी की गई थी। अपर सचिव ऊर्जा व निदेशक उरेडा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि 21 कंपनियों ने पिरूल से बिजली बनाने में दिलचस्पी दिखायी है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर कंपनियों को ठेका आवंटित किया जाएगा। पिरूल से बिजली बनाने को लेकर राज्य में जितने भी प्लांट लगाए जाएंगे, उनसे जितनी भी बिजली पैदा होगी, उसे यूपीसीएल खरीदेगा। इससे कंपनियों के साथ ही पिरूल इकट्ठा करने वाली संस्थाओं को भी भारी मुुनाफा होगा। वन विभाग के आंकड़ों पर नजर वर्तमान में राज्य में हर साल 15 लाख मीट्रिक टन पिरूल होता है।
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पिरूल से बिजली बनाने को लेकर राज्य सरकार की ओर से नीति घोषित किए जाने के बाद 21 कंपनियोें ने दिलचस्पी दिखायी है। इसके अलावा एक कंपनी ने पिरूल से ईंट बनाने को लेकर भी दिलचस्पी दिखायी है। अपर सचिव ऊर्जा व निदेशक उरेडा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि विभागीय स्तर पर सारी प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा।
बता दें, राज्य सरकार ने पिरूल से बिजली बनाने के लिए नीति घोषित की है। सरकार व ऊर्जा विभाग ने पिरूल से सालाना 150 मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल उरेडा की ओर से 25-25 किलोवाट क्षमता के 20 प्लांट लगाने को लेकर निविदा जारी की गई थी। अपर सचिव ऊर्जा व निदेशक उरेडा कैप्टन आलोक शेखर तिवारी ने बताया कि 21 कंपनियों ने पिरूल से बिजली बनाने में दिलचस्पी दिखायी है। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर कंपनियों को ठेका आवंटित किया जाएगा। पिरूल से बिजली बनाने को लेकर राज्य में जितने भी प्लांट लगाए जाएंगे, उनसे जितनी भी बिजली पैदा होगी, उसे यूपीसीएल खरीदेगा। इससे कंपनियों के साथ ही पिरूल इकट्ठा करने वाली संस्थाओं को भी भारी मुुनाफा होगा। वन विभाग के आंकड़ों पर नजर वर्तमान में राज्य में हर साल 15 लाख मीट्रिक टन पिरूल होता है।
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