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सड़क मंजूर, सीएम कर चुके शिलान्यास, मगर नहीं हुआ निर्माण
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:53 AM IST
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वित्तीय मंजूरी मिलने के बावजूद नहीं बनी सड़क
-- शांति सेना के शहीद का गांव यातायात सुविधा से महरूम
-- सड़क मंजूर, सीएम कर चुके शिलान्यास, मगर नहीं हुआ सड़क का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
यमकेश्वर प्रखंड में स्वीकृत वासबा-खेड़ा-दुबड़ा-तौलसारी-गुजराड़ी मोटर मार्ग वित्तीय मंजूरी मिलने के पांच साल बाद भी नहीं बन पाई है। यह स्थिति है प्रखंड की ग्राम सभा खेड़ा दुबड़ के शहीद उम्मेद सिंह रावत के गांव की है। 1988 में भारत से श्रीलंका भेजी गई शांति सेना के जवान उम्मेद सिंह ने संघर्ष के दौरान शहादत दी थी। उनके गांव के वाशिंदे सरकार से गांव को यातायात से जोड़ने की मांग कर रहे हैं मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
ग्राम सभा खेड़ा ने वर्ष 2009 में उक्त गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए बैठक में दो किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव पारित किया था। जिस पर तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक की निधि से तीन साल बाद यानि 2012 में 25 लाख की वित्तीय मंजूरी मिली थी। बावजूद इसके लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन ने मार्ग का निर्माण नहीं कराया। इसके बाद विभाग द्वारा 2014 में उक्त मार्ग को राज्य वित्त योजना के तहत प्रस्तावित किया गया। सड़क बनाने के लिए दिसंबर-2016 में 89 लाख की वित्तीय मंजूरी भी मिल चुकी है।
इतना ही नहीं सितंबर 2017 में पौड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री उक्त सड़क का शिलान्यास भी कर चुके हैं। मगर धरातल पर अभी न तो शिला का कहीं कोई अता पता है और न ही सड़क का। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों को सड़क की मंजूरी के बावजूद पैदल पगडंडियां नापने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान सुनील कुमार व उप प्रधान कन्हैया लाल सेमवाल ने बताया कि ग्रामीण आठ साल से गांव को यातायात संपर्क से जोड़ने को संघर्षरत हैं, मगर सड़क की मंजूरी मिलने के बावजूद विभाग हीलाहवाली कर रहा है।
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विधायक व ईई बना रहे टेंडर प्रक्रिया का बहाना
ऋषिकेश। स्वीकृति के बावजूद सड़क योजना के निर्माण में विलंब के सवाल पर यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के स्तर पर इस मामले में टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। जबकि दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी दुगड्डा डिवीजन के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह का कहना है कि कुछ समय पूर्व तक विभागीय योजनाओं की टेंडरिंग प्रक्रिया में रोक लगाई गई थी। अब इस पर कार्य हो रहा है। टेंडरिंग प्रक्रिया पूर्ण होने पर जल्द सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा।
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-- शांति सेना के शहीद का गांव यातायात सुविधा से महरूम
-- सड़क मंजूर, सीएम कर चुके शिलान्यास, मगर नहीं हुआ सड़क का निर्माण
अमर उजाला ब्यूरो
यमकेश्वर प्रखंड में स्वीकृत वासबा-खेड़ा-दुबड़ा-तौलसारी-गुजराड़ी मोटर मार्ग वित्तीय मंजूरी मिलने के पांच साल बाद भी नहीं बन पाई है। यह स्थिति है प्रखंड की ग्राम सभा खेड़ा दुबड़ के शहीद उम्मेद सिंह रावत के गांव की है। 1988 में भारत से श्रीलंका भेजी गई शांति सेना के जवान उम्मेद सिंह ने संघर्ष के दौरान शहादत दी थी। उनके गांव के वाशिंदे सरकार से गांव को यातायात से जोड़ने की मांग कर रहे हैं मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही।
ग्राम सभा खेड़ा ने वर्ष 2009 में उक्त गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए बैठक में दो किलोमीटर सड़क का प्रस्ताव पारित किया था। जिस पर तत्कालीन क्षेत्रीय विधायक की निधि से तीन साल बाद यानि 2012 में 25 लाख की वित्तीय मंजूरी मिली थी। बावजूद इसके लोक निर्माण विभाग दुगड्डा डिवीजन ने मार्ग का निर्माण नहीं कराया। इसके बाद विभाग द्वारा 2014 में उक्त मार्ग को राज्य वित्त योजना के तहत प्रस्तावित किया गया। सड़क बनाने के लिए दिसंबर-2016 में 89 लाख की वित्तीय मंजूरी भी मिल चुकी है।
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इतना ही नहीं सितंबर 2017 में पौड़ी में आयोजित एक कार्यक्रम में सूबे के मुख्यमंत्री उक्त सड़क का शिलान्यास भी कर चुके हैं। मगर धरातल पर अभी न तो शिला का कहीं कोई अता पता है और न ही सड़क का। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों को सड़क की मंजूरी के बावजूद पैदल पगडंडियां नापने को मजबूर होना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान सुनील कुमार व उप प्रधान कन्हैया लाल सेमवाल ने बताया कि ग्रामीण आठ साल से गांव को यातायात संपर्क से जोड़ने को संघर्षरत हैं, मगर सड़क की मंजूरी मिलने के बावजूद विभाग हीलाहवाली कर रहा है।
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विधायक व ईई बना रहे टेंडर प्रक्रिया का बहाना
ऋषिकेश। स्वीकृति के बावजूद सड़क योजना के निर्माण में विलंब के सवाल पर यमकेश्वर विधायक ऋतु खंडूड़ी का कहना है कि पीडब्ल्यूडी के स्तर पर इस मामले में टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जल्द सड़क का निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। जबकि दूसरी ओर पीडब्ल्यूडी दुगड्डा डिवीजन के अधिशासी अभियंता निर्भय सिंह का कहना है कि कुछ समय पूर्व तक विभागीय योजनाओं की टेंडरिंग प्रक्रिया में रोक लगाई गई थी। अब इस पर कार्य हो रहा है। टेंडरिंग प्रक्रिया पूर्ण होने पर जल्द सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा।