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क्रमिक अनशन पर भड़के शिक्षा निदेशक
Updated Sat, 28 Jul 2018 02:20 AM IST
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क्रमिक अनशन पर भड़के शिक्षा निदेशक
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजकीय शिक्षक संघ के शिक्षा महानिदेशालय पर चल रहे क्रमिक अनशन से शिक्षा निदेशक आरके कुंवर का गुस्सा भड़क गया है। उन्होंने शिक्षकों के आंदोलन को गलत बताते हुए उसे तुरंत समाप्त करने की मांग की है।
शिक्षा निदेशक ने संघ पदाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि शिक्षकों ने गत सात मई को मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजा था। मांग पत्र के आधार पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को एसीपी का लाभ, सातवें वेतनमान के बाद वेतन विसंगति, विद्यालयों के कोटिकरण में हुई त्रुटियों में सुधार, स्थानांतरण एक्ट में छूट, चयन, प्रोन्नत वेतनमान, पुरानी पेंशन संबंधित मांग शामिल है। शासन स्तर पर शिक्षक संघ पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में कोर्ट या अन्य स्तरों पर विचाराधीन प्रकरणों को छोड़कर अन्य पर सहमति भी बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि उसके बावजूद शिक्षकों का धरना देना नियम विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि दो जुलाई से प्रदेश में विद्यालय खुल गए और पढ़ाई हो रही है। ऐसे में राज्यभर से शिक्षकों का निदेशालय पहुंचकर धरना देना ठीक नहीं है। उन्होंने तुरंत धरना प्रदर्शन समाप्त न करने पर विभाग और शासन स्तर से कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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शिक्षकों का धरना जारी
देहरादून। शिक्षा महानिदेशालय में राजकीय शिक्षक का क्रमिक अनशन शुक्रवार को भी जारी रहा। सातवें दिन शिव सिंह नेगी और सुदर्शन नौटियाल क्रमिक अनशन पर बैठे। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश ने शिक्षा महानिदेशालय पहुंचकर शिक्षकों के आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग करेंगी। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी, महामंत्री डा. सोहन माझिला, मुकेश बहुगुणा, योगेश घिल्डियाल, अनुज चौधरी, रविंद्र राणा, धीरेंद्र कुमार पाठक, अनूप भंडारी, मक्खन लाल शाह, राकेश मठपाल, राकेश गैरोला समेत अन्य ने समर्थन में धरना दिया।
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कोट .
वित्त को छोड़कर अन्य लंबित मांगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। अगर सरकार को लगता है कि सभी मांगों पर सहमति बन गई है तो क्यों नहीं उनका पत्र हमें दिया जाता। हमारी हड़ताल से किसी भी विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है।
- डा. सोहन माझिला, महामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। राजकीय शिक्षक संघ के शिक्षा महानिदेशालय पर चल रहे क्रमिक अनशन से शिक्षा निदेशक आरके कुंवर का गुस्सा भड़क गया है। उन्होंने शिक्षकों के आंदोलन को गलत बताते हुए उसे तुरंत समाप्त करने की मांग की है।
शिक्षा निदेशक ने संघ पदाधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि शिक्षकों ने गत सात मई को मुख्यमंत्री के नाम पत्र भेजा था। मांग पत्र के आधार पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को एसीपी का लाभ, सातवें वेतनमान के बाद वेतन विसंगति, विद्यालयों के कोटिकरण में हुई त्रुटियों में सुधार, स्थानांतरण एक्ट में छूट, चयन, प्रोन्नत वेतनमान, पुरानी पेंशन संबंधित मांग शामिल है। शासन स्तर पर शिक्षक संघ पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में कोर्ट या अन्य स्तरों पर विचाराधीन प्रकरणों को छोड़कर अन्य पर सहमति भी बन चुकी है।
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उन्होंने कहा कि उसके बावजूद शिक्षकों का धरना देना नियम विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि दो जुलाई से प्रदेश में विद्यालय खुल गए और पढ़ाई हो रही है। ऐसे में राज्यभर से शिक्षकों का निदेशालय पहुंचकर धरना देना ठीक नहीं है। उन्होंने तुरंत धरना प्रदर्शन समाप्त न करने पर विभाग और शासन स्तर से कार्रवाई की चेतावनी दी है।
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शिक्षकों का धरना जारी
देहरादून। शिक्षा महानिदेशालय में राजकीय शिक्षक का क्रमिक अनशन शुक्रवार को भी जारी रहा। सातवें दिन शिव सिंह नेगी और सुदर्शन नौटियाल क्रमिक अनशन पर बैठे। नेता प्रतिपक्ष डा. इंदिरा हृदयेश ने शिक्षा महानिदेशालय पहुंचकर शिक्षकों के आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर शिक्षकों की समस्याओं के समाधान की मांग करेंगी। राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी, महामंत्री डा. सोहन माझिला, मुकेश बहुगुणा, योगेश घिल्डियाल, अनुज चौधरी, रविंद्र राणा, धीरेंद्र कुमार पाठक, अनूप भंडारी, मक्खन लाल शाह, राकेश मठपाल, राकेश गैरोला समेत अन्य ने समर्थन में धरना दिया।
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कोट .
वित्त को छोड़कर अन्य लंबित मांगों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। अगर सरकार को लगता है कि सभी मांगों पर सहमति बन गई है तो क्यों नहीं उनका पत्र हमें दिया जाता। हमारी हड़ताल से किसी भी विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है।
- डा. सोहन माझिला, महामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ