{"_id":"5ab16d614f1c1bbe758b6869","slug":"151521577313-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार के आदेश से खफा स्कूलों ने बुलाई बैठक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार के आदेश से खफा स्कूलों ने बुलाई बैठक
Updated Wed, 21 Mar 2018 01:55 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
सरकार के एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के आदेश के बाद स्कूल संचालक नाराज हैं। राजधानी और आसपास के सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों ने 22 मार्च को एक बड़ी बैठक बुलाई है। बैठक में स्कूल संचालक अनिश्चितकालीन बंदी पर फैसला लेंगे। पहली बार इस मामले पर सभी निजी स्कूलों की एसोसिएशन एकजुट नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि सरकार जबरन उनके ऊपर नियम थोप रही है। सीबीएसई भी रेफरेंस बुक लगाने की इजाजत देता है।
प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन (पीपीएसए) के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने बताया कि वह मंत्री अरविंद पांडे के अलावा शिक्षा सचिव डॉ. भूपेंद्र कौर औलख से भी मिल चुके हैं। जबकि मंत्री ने सोमवार तक मामले का हल निकालने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि शिक्षा सचिव से भी अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। शिक्षा विभाग दो बार आदेश कर चुका है। ऐसे हालात में काम करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले में निजी स्कूलों की सभी एसोसिएशन एकजुट हो गई हैं। 22 मार्च को तय किया जाएगा कि अगर सरकार ने इस नियम से राहत न दी तो सभी स्कूल बंद कर दिए जाएंगे।
.........................
यह है मामला
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने इस साल से सभी निजी स्कूलों में भी केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाने का आदेश दिया। इस आदेश के तहत शिक्षा विभाग सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निजी स्कूलों की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश जारी कर चुका है। निजी स्कूल लगातार सरकार और शासन के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय और शिक्षा सचिव डा. भूपेंद्र कौर औलख से मिल चुका है। बावजूद इसके अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सरकार के एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के आदेश के बाद स्कूल संचालक नाराज हैं। राजधानी और आसपास के सभी प्राइवेट स्कूल संचालकों ने 22 मार्च को एक बड़ी बैठक बुलाई है। बैठक में स्कूल संचालक अनिश्चितकालीन बंदी पर फैसला लेंगे। पहली बार इस मामले पर सभी निजी स्कूलों की एसोसिएशन एकजुट नजर आ रही हैं। उनका कहना है कि सरकार जबरन उनके ऊपर नियम थोप रही है। सीबीएसई भी रेफरेंस बुक लगाने की इजाजत देता है।
प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन (पीपीएसए) के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने बताया कि वह मंत्री अरविंद पांडे के अलावा शिक्षा सचिव डॉ. भूपेंद्र कौर औलख से भी मिल चुके हैं। जबकि मंत्री ने सोमवार तक मामले का हल निकालने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि शिक्षा सचिव से भी अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। शिक्षा विभाग दो बार आदेश कर चुका है। ऐसे हालात में काम करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले में निजी स्कूलों की सभी एसोसिएशन एकजुट हो गई हैं। 22 मार्च को तय किया जाएगा कि अगर सरकार ने इस नियम से राहत न दी तो सभी स्कूल बंद कर दिए जाएंगे।
विज्ञापन
.........................
यह है मामला
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने इस साल से सभी निजी स्कूलों में भी केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाने का आदेश दिया। इस आदेश के तहत शिक्षा विभाग सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निजी स्कूलों की जांच कर रिपोर्ट देने का आदेश जारी कर चुका है। निजी स्कूल लगातार सरकार और शासन के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय और शिक्षा सचिव डा. भूपेंद्र कौर औलख से मिल चुका है। बावजूद इसके अभी तक कोई नतीजा नहीं निकल पाया है।
विज्ञापन