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विस्थापन की मांग के लिए ग्रामीणों ने एएचपीसीएल कार्यालय में डाला डेरा
Updated Fri, 05 Jan 2018 10:57 PM IST
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श्रीनगर। धारी-थलीसैंण के ग्रामीणों ने विस्थापन की मांग के लिए जल विद्युत परियोजना कंपनी (एएचपीसीएल) कार्यालय में परिवार सहित डेरा डाल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी वर्ष 2011 से केवल आश्वासन दे रही है। वहीं कंपनी प्रशासन का कहना है कि अनुबंध के तहत ग्रामीणों को भुगतान किया गया है। ग्रामीणों से वार्ता की जा रही है।
शुक्रवार को धारी-थलीसैंण के करीब 20 परिवारों के ग्रामीणों ने बच्चों सहित जल विद्युत परियोजना कंपनी कार्यालय में डेरा डाल दिया। धारी के पूर्व प्रधान शंकर लाल ने बताया कि उनका गांव डूब क्षेत्र में है। कंपनी ने वर्ष 2011 में धारी-थलीसैंण के सभी ग्रामीणों को विस्थापन का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक विस्थापन नहीं किया गया है। जबकि इस संबंध में कंपनी प्रशासन से कई बार वार्ता भी की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है। शंकर लाल ने बताया कि अब ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो गई है, जिससे ग्रामीणों को मजबूरन कंपनी कार्यालय में डेरा डालना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक विस्थापन मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक वह कंपनी कार्यालय से नहीं हटेंगे। वहीं जल विद्युत परियोजना कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी वाईआर शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों को अनुबंध के तहत भुगतान किया गया है। फिर भी ग्रामीणों से वार्ता की जाएगी। ब्यूरो
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शुक्रवार को धारी-थलीसैंण के करीब 20 परिवारों के ग्रामीणों ने बच्चों सहित जल विद्युत परियोजना कंपनी कार्यालय में डेरा डाल दिया। धारी के पूर्व प्रधान शंकर लाल ने बताया कि उनका गांव डूब क्षेत्र में है। कंपनी ने वर्ष 2011 में धारी-थलीसैंण के सभी ग्रामीणों को विस्थापन का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक विस्थापन नहीं किया गया है। जबकि इस संबंध में कंपनी प्रशासन से कई बार वार्ता भी की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिलता है। शंकर लाल ने बताया कि अब ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब हो गई है, जिससे ग्रामीणों को मजबूरन कंपनी कार्यालय में डेरा डालना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक विस्थापन मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक वह कंपनी कार्यालय से नहीं हटेंगे। वहीं जल विद्युत परियोजना कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी वाईआर शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों को अनुबंध के तहत भुगतान किया गया है। फिर भी ग्रामीणों से वार्ता की जाएगी। ब्यूरो
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