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प्राइवेट सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड कराने को मजबूर
Updated Mon, 12 Jun 2017 09:51 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट 30 जून तक अवकाश पर हैं। सोमवार को चिकित्सकों ने 35 गर्भवती मलिाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा। अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला लटका होने के कारण महिलाओं को प्राइवेट सेंटरों का रुख करना पड़ा। गर्भवती महिलाओं को एनएचएम की निशुल्क योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। सीएमएस सीएमओ से रेडियोलॉजिस्ट का प्रबंध कराने को लिख चुकी है, लेकिन पीएनडीटी एक्ट के झंझावत के चलते हुए गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड केंद्र खोलने एवं रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट ही नहीं है। ऐसे में जिला अस्पताल या मेला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड होते हैं। इस समय मेला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड के केंद्र का कंप्यूटर खराब होने के चलते हुए पीएनडीटी एक्ट के फार्म भरे नहीं जाने के कारण गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे है तो जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट एक जून से अवकाश पर हैं। सीएमएस डा. भवानी पाल ने बताया कि सरकारी डाक्टर प्राइवेट केंद्रों पर भी नहीं भेज सकते, लेकिन गर्भवतियों की मजबूरी के चलते हुए उन्हें प्राइवेट केंद्रों से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
हरिद्वार।
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट 30 जून तक अवकाश पर हैं। सोमवार को चिकित्सकों ने 35 गर्भवती मलिाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए लिखा। अल्ट्रासाउंड केंद्र पर ताला लटका होने के कारण महिलाओं को प्राइवेट सेंटरों का रुख करना पड़ा। गर्भवती महिलाओं को एनएचएम की निशुल्क योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। सीएमएस सीएमओ से रेडियोलॉजिस्ट का प्रबंध कराने को लिख चुकी है, लेकिन पीएनडीटी एक्ट के झंझावत के चलते हुए गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे है।
महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड केंद्र खोलने एवं रेडियोलॉजिस्ट की पोस्ट ही नहीं है। ऐसे में जिला अस्पताल या मेला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड होते हैं। इस समय मेला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड के केंद्र का कंप्यूटर खराब होने के चलते हुए पीएनडीटी एक्ट के फार्म भरे नहीं जाने के कारण गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे है तो जिला अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट एक जून से अवकाश पर हैं। सीएमएस डा. भवानी पाल ने बताया कि सरकारी डाक्टर प्राइवेट केंद्रों पर भी नहीं भेज सकते, लेकिन गर्भवतियों की मजबूरी के चलते हुए उन्हें प्राइवेट केंद्रों से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
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