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नगर निगम ने भगवान भरोसे छोड़ रखा है रैन बसेरों को
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:09 AM IST
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हरिद्वार। नगर निगम क्षेत्र में बने रैन बसेरों में रहने वाले गरीब लोग भगवान भरोसे ठिठुरन वाली रातें काट रहे हैं। रैन बसेरों में सुविधाओं के नाम पर शाम के समय अलाव जलाने के लिए कुछ सूखी लकड़ियां जरूरी डाल दी जाती हैं, बाकी यहां कुछ भी नहीं है। स्थिति यह है कि रैन बसेरों में बिजली तक की व्यवस्था नहीं। पिछले दिनों अधिकारियों के निरीक्षण के बाद भी इनकी सुध नहीं ली गई, जबकि तब दावा किया गया था कि जल्द ही सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
हरकी पैड़ी के समीप रोडी बेलवाला में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग दो रैन बसेरे बनाए गए हैं। इन रैन बसेरों में इन दिनों काफी संख्या में बेघर लोग शरण लेने पहुंचते हैं। इन दिनों रात के समय धर्मनगरी का न्यूनतम तापमान सात से आठ डिग्री के आसपास पहुंच जाता है। रात के समय हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। ऐसे में यह रैन बसेरे भी गरीबों को राहत नहीं दे पा रहे। कारण यह कि यह कोई सुविधा नहीं है। नगर निगम ने इन रैन बसेरों को भगवान भरोसे छोड़ रखा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार यहां बिजली-पानी, शौचालय, कंबल और चिकित्सा की सुविधा होनी चाहिए। सुविधा के नाम पर पिछले 20 दिन से शाम को केवल लकड़ी डालकर अलाव जलाया जा रहा है। इन रैन बसेरों के कंबलों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। उनमें बदबू आ रही है और गरीब लोग मजबूरी में ओढ़ रहे हैं।
द्वारिकाधीश सेवा समिति ने दो साल से छोड़ रखा है
हरिद्वार। रोडी बेलवाला के पुरूष रैन बसेरा में रहते हुए दो साल से संचालन कर रहे बरेली उत्तर प्रदेश निवासी पं. संपूर्णानंद मिश्रा ने बताया कि रोडी बेलवाला के दोनों रैन बसेरों का संचालन और कंबल आदि की व्यवस्था कई साल तक द्वारिकाधीश सेवा समिति दिल्ली की जाती थी। संस्था ने जो लोग रखे थे उन्हें वेतन भी दिया जाता था, लेकिन दो साल से संस्था ने उनका संचालन छोड़ दिया है। द्वारिकाधीश सेवा समिति के प्रबंधक रामप्रकाश ने जनवरी 2016 में उसको रैन बसेरा की चाबी दी थी और तभी से वह उसका संचालन कर रहा है। अपनी आजीविका गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की पूजा पाठ करने से प्राप्त दक्षिणा से चल रही है।
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नगर निगम ऐसी संस्था तथा व्यक्ति की तलाश में है जो रैन बसेरों के संचालन की जिम्मेदारी ले। नगर निगम को अभी तक कोई संस्था मिली नहीं है जो उनका संचालन करने को तैयार हो।
- संजय कुमार, सहायक नगर अधिकारी नगर निगम
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हरकी पैड़ी के समीप रोडी बेलवाला में पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग दो रैन बसेरे बनाए गए हैं। इन रैन बसेरों में इन दिनों काफी संख्या में बेघर लोग शरण लेने पहुंचते हैं। इन दिनों रात के समय धर्मनगरी का न्यूनतम तापमान सात से आठ डिग्री के आसपास पहुंच जाता है। रात के समय हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। ऐसे में यह रैन बसेरे भी गरीबों को राहत नहीं दे पा रहे। कारण यह कि यह कोई सुविधा नहीं है। नगर निगम ने इन रैन बसेरों को भगवान भरोसे छोड़ रखा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार यहां बिजली-पानी, शौचालय, कंबल और चिकित्सा की सुविधा होनी चाहिए। सुविधा के नाम पर पिछले 20 दिन से शाम को केवल लकड़ी डालकर अलाव जलाया जा रहा है। इन रैन बसेरों के कंबलों की स्थिति बहुत खराब हो गई है। उनमें बदबू आ रही है और गरीब लोग मजबूरी में ओढ़ रहे हैं।
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द्वारिकाधीश सेवा समिति ने दो साल से छोड़ रखा है
हरिद्वार। रोडी बेलवाला के पुरूष रैन बसेरा में रहते हुए दो साल से संचालन कर रहे बरेली उत्तर प्रदेश निवासी पं. संपूर्णानंद मिश्रा ने बताया कि रोडी बेलवाला के दोनों रैन बसेरों का संचालन और कंबल आदि की व्यवस्था कई साल तक द्वारिकाधीश सेवा समिति दिल्ली की जाती थी। संस्था ने जो लोग रखे थे उन्हें वेतन भी दिया जाता था, लेकिन दो साल से संस्था ने उनका संचालन छोड़ दिया है। द्वारिकाधीश सेवा समिति के प्रबंधक रामप्रकाश ने जनवरी 2016 में उसको रैन बसेरा की चाबी दी थी और तभी से वह उसका संचालन कर रहा है। अपनी आजीविका गंगाघाट पर श्रद्धालुओं की पूजा पाठ करने से प्राप्त दक्षिणा से चल रही है।
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नगर निगम ऐसी संस्था तथा व्यक्ति की तलाश में है जो रैन बसेरों के संचालन की जिम्मेदारी ले। नगर निगम को अभी तक कोई संस्था मिली नहीं है जो उनका संचालन करने को तैयार हो।
- संजय कुमार, सहायक नगर अधिकारी नगर निगम