{"_id":"5a3c04954f1c1b6e468bbf56","slug":"151388292516-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब बागेश्वर से चार धाम की पैदल यात्रा शुरु करने की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब बागेश्वर से चार धाम की पैदल यात्रा शुरु करने की तैयारी
Updated Fri, 22 Dec 2017 12:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरिद्वार। अगले वर्ष उत्तराखंड के चार धामों की पैदल यात्रा फिर से शुरू की जाएगी। यह यात्रा कुमाऊं मंडल से चलेगी और पवित्र छड़ी के साथ चारधाम पहुंचेगी। आरंभिक चरण में इसे बदरी और केदार के लिए चलाया जाएगा। यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व प्राचीन पैदल मार्ग का जीर्णोद्धार कराने के काम को लेकर उत्तराखंड शासन से वार्ता जारी है।
यह जानकारी जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमंहत हरिगिरि ने पत्रकारों में दी। उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्ष पूर्व चारधाम यात्रा बागेश्वर से हरिद्वार होते हुए पैदल जाया करती थी। सबसे आगे अखाड़े की पवित्र छड़ी चलती थी और पीछे-पीछे संत महात्मा भगवान भोले नाथ का जय घोष करते हुए चलते थे। संतों के पीछे वे हजारों श्रद्घालु रहते थे जो चारधाम यात्रा पर निकलते थे। इस कठिन यात्रा को सुगम बनाने के लिए अखाड़े के संतों ने अनेक चट्टियों और पैदल मार्ग बनवाए। यह कठिन पैदल यात्रा तीन महीने में पूरी होती थी। उसके बाद कोई यात्री चारधाम नहीं जाता था। सड़क और परिवहन सुविधाएं होने के बाद यह यात्रा बंद हो गई। जबकि चार धाम पैदल यात्रा का भारी महत्व है।
श्रीमंहत हरि गिरि ने बताया कि इस संबंध में शासन की वार्तालाप जारी है। प्राचीन पैदल मार्च पर अनेक चट्टियां और विश्राम स्थल है। उन सभी के जिर्णोद्धार सरकार के सहयोग से किया जाएगा। यह मार्ग आज भी ऋषिकेश से चारधाम के लिए लगभग ठीक अवस्था में है। गरुड़ चट्टी, हनुमान चट्टी, फूल चट्टी आदि पर तो आज भी पर्यटक पहुंचते हैं। यदि प्राचीन छड़ी यात्रा फिर शुरू कर दी जाए तो पर्यटक इनका आनंद लेने पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि इस बात के पूरे प्रयास है कि अगले वर्ष यात्रा काल प्रारंभ होते ही यह यात्रा प्रारंभ हो जाए। जूना अखाड़े ने इस कार्य के लिए अखाड़े संयोजकों की टीम गठित कर दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह जानकारी जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्रीमंहत हरिगिरि ने पत्रकारों में दी। उन्होंने कहा कि सैकड़ों वर्ष पूर्व चारधाम यात्रा बागेश्वर से हरिद्वार होते हुए पैदल जाया करती थी। सबसे आगे अखाड़े की पवित्र छड़ी चलती थी और पीछे-पीछे संत महात्मा भगवान भोले नाथ का जय घोष करते हुए चलते थे। संतों के पीछे वे हजारों श्रद्घालु रहते थे जो चारधाम यात्रा पर निकलते थे। इस कठिन यात्रा को सुगम बनाने के लिए अखाड़े के संतों ने अनेक चट्टियों और पैदल मार्ग बनवाए। यह कठिन पैदल यात्रा तीन महीने में पूरी होती थी। उसके बाद कोई यात्री चारधाम नहीं जाता था। सड़क और परिवहन सुविधाएं होने के बाद यह यात्रा बंद हो गई। जबकि चार धाम पैदल यात्रा का भारी महत्व है।
विज्ञापन
श्रीमंहत हरि गिरि ने बताया कि इस संबंध में शासन की वार्तालाप जारी है। प्राचीन पैदल मार्च पर अनेक चट्टियां और विश्राम स्थल है। उन सभी के जिर्णोद्धार सरकार के सहयोग से किया जाएगा। यह मार्ग आज भी ऋषिकेश से चारधाम के लिए लगभग ठीक अवस्था में है। गरुड़ चट्टी, हनुमान चट्टी, फूल चट्टी आदि पर तो आज भी पर्यटक पहुंचते हैं। यदि प्राचीन छड़ी यात्रा फिर शुरू कर दी जाए तो पर्यटक इनका आनंद लेने पहुंचेंगे। उन्होंने बताया कि इस बात के पूरे प्रयास है कि अगले वर्ष यात्रा काल प्रारंभ होते ही यह यात्रा प्रारंभ हो जाए। जूना अखाड़े ने इस कार्य के लिए अखाड़े संयोजकों की टीम गठित कर दी है।
विज्ञापन