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ज्योतिर्मठ के शंकाराचार्य पद हेतु 5
Updated Thu, 21 Dec 2017 12:26 AM IST
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हरिद्वार। ज्योतिर्मठ शंकराचार्य पद चयन के लिए धर्म महामंडल की बैठक काशी में प्रारंभ हो गई। बैठक में 58 नामों पर विचार किया जा रहा है। ये नाम देश भर से प्राप्त हुए हैं। उधर, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि इस पीठ पर उनका चयन पहले ही हो चुका है। स्वयं धर्म सम्राट करपात्री महाराज द्वारा किए गए अभिषेक के कारण उन्हें हटाने की सामर्थ किसे में भी नहीं है।
काशी में धर्म महामंडल पिछले कईं महीनों से विद्वत परिषद के साथ मिलकर शंकराचार्य पद के चयन में जुटा हुआ है। 20 दिसंबर तक देश भर से सन्यासियों से आवेदन मांगे गए थे। यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया था। जो 58 आवेदन प्राप्त हुए हैं उनमें नेपाल की जूना अखाड़े से जुड़ी एक महिला संत भी शामिल हैं। धर्मशास्त्रों की परम विद्वान महिला संत ने बताया कि मठाम्नाय ने महिला संत के शंकराचार्य बनने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। मालूम हो कि हरिद्वार में जब महिला संतों ने शंकराचार्य के समकक्ष पार्वत्याचार्य पद सृजित करने का प्रयास किया था, तब पुरुष संतों ने पंडाल उखाड़ कर महिला संतों को नगर से बाहर खदेड़ दिया दिया था। आश्चर्य का विषय यह है कि अब महिला संत बाकायदा मुख्य शंकराचार्य पद के लिए ही आवेदन कर चुकी हैं। धर्म महामंडल ने उनका आवेदन स्वीकार भी कर लिया है।
उधर, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से जुड़े वेदशास्त्रानुसंधान केंद्र के महामंत्री पवन ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य मठ कनखल से बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि स्वरूपानंद महराज का चयन स्वयं धर्मसम्राट करपात्री महाराज ने अपने हाथों से ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य के रूप में किया था। उन्हें इस पद से धरती के कोई शक्ति नहीं हटा सकती। हाल में उनका पुर्नाभिषेक भी हो चुका है। धर्म सम्राट सर्वोपद है और करपात्री जी की मान्यता जगजाहिर है। उनके संकल्प को न्यायालय को भी देखना चाहिए।
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काशी में धर्म महामंडल पिछले कईं महीनों से विद्वत परिषद के साथ मिलकर शंकराचार्य पद के चयन में जुटा हुआ है। 20 दिसंबर तक देश भर से सन्यासियों से आवेदन मांगे गए थे। यह आदेश इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया था। जो 58 आवेदन प्राप्त हुए हैं उनमें नेपाल की जूना अखाड़े से जुड़ी एक महिला संत भी शामिल हैं। धर्मशास्त्रों की परम विद्वान महिला संत ने बताया कि मठाम्नाय ने महिला संत के शंकराचार्य बनने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। मालूम हो कि हरिद्वार में जब महिला संतों ने शंकराचार्य के समकक्ष पार्वत्याचार्य पद सृजित करने का प्रयास किया था, तब पुरुष संतों ने पंडाल उखाड़ कर महिला संतों को नगर से बाहर खदेड़ दिया दिया था। आश्चर्य का विषय यह है कि अब महिला संत बाकायदा मुख्य शंकराचार्य पद के लिए ही आवेदन कर चुकी हैं। धर्म महामंडल ने उनका आवेदन स्वीकार भी कर लिया है।
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उधर, स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से जुड़े वेदशास्त्रानुसंधान केंद्र के महामंत्री पवन ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य मठ कनखल से बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि स्वरूपानंद महराज का चयन स्वयं धर्मसम्राट करपात्री महाराज ने अपने हाथों से ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य के रूप में किया था। उन्हें इस पद से धरती के कोई शक्ति नहीं हटा सकती। हाल में उनका पुर्नाभिषेक भी हो चुका है। धर्म सम्राट सर्वोपद है और करपात्री जी की मान्यता जगजाहिर है। उनके संकल्प को न्यायालय को भी देखना चाहिए।
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