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शिक्षा विभाग की कार्रवाई कहीं नरम, कहीं गरम
Updated Wed, 20 Dec 2017 10:45 PM IST
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देवाल। खेल महाकुंभ में प्रतिभाग करने गए 48 छात्र-छात्राओं को वापसी के दौरान शिक्षकों की ओर से घर न छोड़कर बीच रास्ते में छोड़ देने के मामले में विभाग ने कार्रवाई की। शिक्षा विभाग ने जहां एक शिक्षक का वेतन रोक दिया है, जबकि दो शिक्षकों को चेतावनी दी है। वहीं एक शिक्षक ने नियमानुसार कार्य किया, जिससे शिक्षक को निर्दोष बताया गया।
3 दिसंबर से 8 दिसंबर तक चमोली जिले के पीपलकोटी में आयोजित खेल महाकुंभ के दौरान ब्लाक के 48 स्कूली छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया था। उनको लाने और ले जाने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की थी। विभागीय अधिकारियों की मानें तो ब्लाक के जीआईसी देवाल, जीआईसी सवाड़ और जीआईसी बोरागाड़ के व्यायाम शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन प्राथमिक विद्यालय पलबरा के शिक्षक भी ड्यूटी के बहाने पीपलकोटी चले गए। बताया जा रहा है कि वापसी के दौरान आठ दिसंबर को शिक्षकों ने बच्चों को घर न पहुंचाकर देवाल मुख्यालय पर ही छोड़ दिया। ऐसे में छात्र-छात्राएं 5 से 12 किमी पैदल चलकर रात नौ बजे घरों को पहुंचे। इस संबंध में अमर उजाला ने 10 दिसंबर के अंक में ‘शिक्षकों ने रास्ते में ही छोड़ दिए विद्यार्थी’ खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मामले का संज्ञान लेते हुए विभाग ने संबंधित चार शिक्षकों को स्पष्टीकरण के नोटिस दिए थे। मामले में खंड शिक्षा अधिकारी बीसी मिश्रा ने बताया कि जीआईसी बोरागाड़ के शिक्षक की ओर से सभी बच्चों को घर तक पहुंचाने में मदद की गई थी, जिन्हें निर्दोष करार दिया गया। जबकि जीआईसी देवाल और सवाड़ के शिक्षकों की पहली गलती होने पर चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। वहीं ड्यूटी नहीं होने के बावजूद प्राथमिक विद्यालय पलबरा के शिक्षक की ओर से महाकुुंभ में जाने को गलती मानते हुए वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं।
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