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पिंकी को आधार कार्ड बनाने के लिए झेलनी पड़ी तकलीफ
Updated Mon, 18 Dec 2017 10:29 PM IST
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श्रीनगर। केंद्र सरकार ने हर सरकारी योजना के लिए आधार कार्ड अनिवार्य तो कर दिया, लेकिन इसको बनाने में हो रही व्यवहारिक दिक्कतों की ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजन दिव्यांग परेशान हो रहे हैं। ऐसा ही ताजातरीन मामला है टिहरी जिले के विकास खंड कीर्तिनगर के धौल्याणा गांव की पिंकी का। रीढ़ की हड्डी की चोट से चलने में असमर्थ होने पर उसके पिता आधार बनाने के लिए पिंकी को गांव से सड़क मार्ग तक पालकी पर श्रीनगर लाए। एक आधार कार्ड बनाने पर उनके दो हजार रुपये से ऊपर खर्च हो गए।
आधार कार्ड नहीं होने से पिंकी को समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली पेंशन बंद हो गई है। ऐसे में उसे आधार कार्ड बनवाना ही था। पिंकी का गांव बडियारगढ़ पट्टी का धौल्याणा है। यह गांव श्रीनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर है। सड़क से उसके ेगांव पहुंचने के लिए एक किमी पैदल चलना पड़ता है। पिंकी पहाड़ी से गिरने से चलने-फिरने में असमर्थ है। उसके पिता प्रेम सिंह और मां बिस्तर में लेटी पिंकी की देखभाल करते हैं। उसको समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांग पेंशन मिलती है। आधार कार्ड नहीं होने से उसकी पेंशन बंद हो गई। ऐसे में सोमवार को प्रेम सिंह गांव के युवकों रॉकी, नरेंद्र व बलदेव के साथ पिंकी को सड़क तक पालकी में लाए। इसके बाद दो हजार रुपये में टैक्सी बुक करनी पड़ी। तब जाकर उसे आधार कार्ड बनाने वाले केंद्र तक पहुंचाया जा सका। सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी और मनोज जोशी ने बताया कि दिव्यांगों के आधार कार्ड बनाने के लिए कुछ नई व्यवस्था करनी चाहिए या उन्हें आधार से छूट दी जानी चाहिए।
आधार कार्ड नहीं होने से पिंकी को समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली पेंशन बंद हो गई है। ऐसे में उसे आधार कार्ड बनवाना ही था। पिंकी का गांव बडियारगढ़ पट्टी का धौल्याणा है। यह गांव श्रीनगर से करीब 40 किलोमीटर दूर है। सड़क से उसके ेगांव पहुंचने के लिए एक किमी पैदल चलना पड़ता है। पिंकी पहाड़ी से गिरने से चलने-फिरने में असमर्थ है। उसके पिता प्रेम सिंह और मां बिस्तर में लेटी पिंकी की देखभाल करते हैं। उसको समाज कल्याण विभाग की ओर से दिव्यांग पेंशन मिलती है। आधार कार्ड नहीं होने से उसकी पेंशन बंद हो गई। ऐसे में सोमवार को प्रेम सिंह गांव के युवकों रॉकी, नरेंद्र व बलदेव के साथ पिंकी को सड़क तक पालकी में लाए। इसके बाद दो हजार रुपये में टैक्सी बुक करनी पड़ी। तब जाकर उसे आधार कार्ड बनाने वाले केंद्र तक पहुंचाया जा सका। सामाजिक कार्यकर्ता हनुमंत भंडारी और मनोज जोशी ने बताया कि दिव्यांगों के आधार कार्ड बनाने के लिए कुछ नई व्यवस्था करनी चाहिए या उन्हें आधार से छूट दी जानी चाहिए।
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